संवाद सहयोगी, उजियारपुर। मशरूम की खेती घर में ही आसानी से की जा सकती है। इसका उपयोग स्वयं के लिए करने के साथ-साथ इसे बेचकर अच्छी आमदनी भी प्राप्त की जा सकती है। मशरूम में न केवल रोगों से लड़ने की क्षमता अधिक होती है, बल्कि इसके नियमित सेवन से कई बीमारियों से बचाव भी होता है।
कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली यह खेती घर में समृद्धि लाने का सरल और सुगम उपाय है। उक्त बातें बेलारी पंचायत के युवा किसान अशोक कुमार सिंह ने कही।
उन्होंने कृषि प्रौद्योगिकी अभिकरण (आत्मा) द्वारा आयोजित दो दिवसीय जिला स्तरीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण में भाग लेने के बाद अपने पंचायत के बेरोजगार युवाओं और किसानों के बीच यह जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि मशरूम पोषक तत्वों का भंडार है। इसमें 25 से 30 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया जाता है, जो मांस, मछली और अंडे की तुलना में बेहतर गुणवत्ता का होता है। यह हृदय, लीवर और किडनी के लिए भी लाभकारी बताया जाता है।
आत्मा के प्रखंड तकनीकी प्रबंधक मुकेश कुमार ने बताया कि प्रखंड के चांदचौर पूर्वी पंचायत की सात महिलाओं सहित कुल 11 महिलाएं और 24 पुरुष किसानों को मशरूम उत्पादन के आधुनिक तौर-तरीकों का प्रशिक्षण दिया गया है। इसका उद्देश्य गांव-गांव में मशरूम उत्पादन के प्रति जागरूकता बढ़ाना और नई तकनीक से उत्पादन को प्रोत्साहित करना है, ताकि उत्पादकों को लागत से कई गुना अधिक लाभ मिल सके।
उन्होंने बताया कि आने वाले समय में मधुमक्खी पालन के प्रशिक्षण के लिए भी लोगों की सूची तैयार की जा रही है। वहीं प्रखंड आत्मा अध्यक्ष सूर्यकांत चौधरी ने प्रशिक्षण लेकर लौटे प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि वे अपने अनुभवों को गांव के अन्य लोगों के साथ साझा करेंगे। |
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