search
 Forgot password?
 Register now
search

पाकिस्तान में हिंदुओं के लिए अब सवाल समानता का नहीं, बल्कि अस्तित्व का है; पत्रकार भी मारे गए

LHC0088 4 hour(s) ago views 778
  

नेपाली मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हिंदुओं की हत्याएं असहिष्णुता की संस्कृति को दर्शाती हैं  (फाइल फोटो)



आइएएनएस, काठमांडू। पाकिस्तान में कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों के बढ़ते प्रभाव और सरकार के सीमित समर्थन के कारण अल्पसंख्यकों विशेषकर हिंदुओं के लिए अब सवाल समानता का नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व का है। भीड़ द्वारा संचालित न्याय और व्यवस्था की उदासीनता ने हिंदुओं के लिए पाकिस्तान को एक बेहद प्रतिकूल स्थान बना दिया है।
पाकिस्तान में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं बार-बार होती रहती हैं

एक रिपोर्ट में पड़ोसी देश में हिंदू अल्पसंख्यकों की चिंताजनक स्थिति और वहां व्याप्त असहिष्णुता की संस्कृति को प्रमुखता से उजागर किया गया है। सिंध प्रांत में, जहां देश की अधिकांश हिंदू अल्पसंख्यक आबादी रहती है, ईशनिंदा के आरोपों से भड़की सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं बार-बार होती रहती हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि ये हमले एक समान पैटर्न पर होते हैं, जिसकी शुरुआत एक आरोप से होती है, उसके बाद भीड़ जुटाई जाती है, सांप्रदायिक अशांति फैलती है और अंतत: प्रभावित हिंदू समुदाय को जबरन विस्थापित किया जाता है।

नेपाली मीडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, सिंध प्रांत में हाल ही में एक युवा हिंदू किसान की हत्या ने असुरक्षा की भावना को फिर से उजागर किया है। कोहली समुदाय के इस किसान की हत्या एक बाहुबली जमींदार के साथ भूमि विवाद के दौरान दिनदहाड़े गोली मारकर कर दी गई।

यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि वहां व्याप्त \“दोषमुक्ति की संस्कृति\“ और \“सामंती ताकत\“ का प्रतीक है। रिपोर्ट में \“सेंटर फार सोशल जस्टिस\“ (लाहौर) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का जीवन कितना कठिन हो चुका है।

2021 से 2024 के बीच अल्पसंख्यक महिलाओं और लड़कियों के जबरन मतांतरण के कम से कम 421 मामले दर्ज किए गए। इन पीडि़तों में से 71 प्रतिशत लड़कियां नाबालिग थीं, जिनमें अधिकांश हिंदू और ईसाई समुदायों से थीं। ¨हदुओं के खिलाफ ¨हसा किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक \“व्यापक व्यवस्थागत विफलता और राष्ट्रीय असहिष्णुता\“ का हिस्सा है। जबरन मतांतरण को अपराध घोषित करने के लिए अब तक कोई प्रभावी राष्ट्रीय कानून नहीं बनाया गया है।
पिछले 10 वर्षों में पाकिस्तान में 35 पत्रकारों की हुई हत्या

पाकिस्तान पत्रकारों के लिए भी दुनिया के सबसे खतरनाक स्थानों में से एक बना हुआ है। रिपोर्टर्स विदाउट बार्डर्स (आरएसएफ) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में पाकिस्तान में 35 पत्रकारों की हत्या कर दी गई है, लेकिन इन मामलों में कोई ठोस जांच नहीं चल रही है। हत्यारे अभी भी फरार हैं।

कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) की एशिया-प्रशांत निदेशक बेह लिह यी ने कहा कि पाकिस्तान में पत्रकार की हत्या करना सबसे सुरक्षित अपराधों में से एक बन गया है। \“अब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पर यह साबित करने की जिम्मेदारी है कि पत्रकारों की रक्षा करने के अपने वादे को उन्होंने गंभीरता से निभाया - या फिर उनके शब्द केवल खोखले वादे हैं।\“
like (0)
LHC0088Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
LHC0088

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1510K

Credits

Forum Veteran

Credits
155374

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com