नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) इस नतीजे पर पहुंची है कि यह कोई अचानक हुआ हादसा नहीं था। जांच में कहा गया है कि अगर समय पर सही कदम उठाए गए होते और गंभीर चूकें न होतीं, तो 27 साल के युवराज की जान बचाई जा सकती थी। जांच रिपोर्ट में सिस्टम की कई बड़ी कमियां सामने आई हैं। इससे शहर के प्रशासन, आपदा प्रबंधन और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। SIT ने बताया कि कई विभागों की लापरवाही इस मौत की वजह बनी।
सामने आई ये बड़ी रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा अथॉरिटी, पुलिस, फायर सर्विस और ट्रैफिक मैनेजमेंट से जुड़े विभागों ने समय पर सही कार्रवाई नहीं की। देरी और लापरवाही के कारण हालात बिगड़ते चले गए और आखिरकार युवक की जान चली गई। जांच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने न्यूज 18 को बताया कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का साफ मानना है कि यह कोई अचानक हुआ हादसा नहीं था। अधिकारी के अनुसार, कई सिस्टम एक साथ फेल हो गए थे, जैसे सड़क सुरक्षा, ड्रेनेज व्यवस्था, आपदा राहत और कमांड कंट्रोल सिस्टम। अगर इनमें से कोई भी एक व्यवस्था ठीक से काम करती, तो युवक की जान बचाई जा सकती थी।
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हादसे में गई थी युवराज की जान
यह घटना 16 और 17 जनवरी की दरमियानी रात की है। जब युवराज मेहता काम से घर लौट रहे थे, तब ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में उनकी कार सड़क पर बने एक गहरे और पानी से भरे गड्ढे में गिर गई। इस हादसे में उनकी डूबने से मौत हो गई। उस समय इलाके में घना कोहरा था, दिखाई बहुत कम दे रही थी और सड़क पर चल रहे निर्माण कार्य के लिए की गई खुदाई पर कोई चेतावनी या निशान नहीं लगा था। इसी वजह से एक सामान्य ड्राइव जानलेवा बन गई।
रात करीब आधी रात के समय कार अधूरे निर्माण के लिए खोदे गए पानी से भरे गड्ढे में गिर गई। युवराज कार के अंदर फंस गए और तैर नहीं पाए। किसी तरह वह गाड़ी की छत पर चढ़े और मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर मदद के लिए बार-बार आवाज लगाते रहे। अंधेरे और सन्नाटे में उनकी मदद की पुकार गूंजती रही, लेकिन समय पर कोई सहायता नहीं पहुंच सकी।
SIT की जांच में क्या सामने आया?
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने इस मामले में कई विभागों से जवाब मांगे। SIT ने नोएडा अथॉरिटी, पुलिस, ट्रैफिक सेल, फायर सर्विस और आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों से 22 से ज्यादा अहम सवाल पूछे। जांच के दौरान संबंधित विभागों ने लंबी-चौड़ी रिपोर्टें सौंपीं। नोएडा अथॉरिटी ने करीब 150 पन्नों की रिपोर्ट दी, जबकि पुलिस ने लगभग 450 पन्नों की रिपोर्ट जमा की। हालांकि, SIT से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इन रिपोर्टों में मुख्य चूकों का साफ जवाब नहीं मिला। खास तौर पर बचाव कार्य में हुई करीब दो घंटे की देरी को ठीक से नहीं समझाया गया।
अब SIT आगे की जांच के लिए मेरठ गई है। जांच पूरी होने के बाद सभी नतीजे योगी आदित्यनाथ को सौंपे जाएंगे। अंतिम रिपोर्ट की समीक्षा के बाद इस मामले में प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
नहीं थे कोई सुरक्षा के इंतजाम
नोएडा अथॉरिटी के सीईओ पर शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी होती है। लेकिन जांच में सामने आया कि एक अप्रूव्ड प्लॉट के पास सड़क की खुदाई अधूरी थी और वहां कोई बैरिकेड या चेतावनी नहीं लगाई गई थी। इसके बावजूद निगरानी करने वाले अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। दस्तावेज़ों से पता चला कि सड़क निर्माण का काम मंजूर तो किया गया था, लेकिन बाद में न तो सही निगरानी हुई और न ही सुरक्षा उपाय लागू किए गए। SIT का मानना है कि यही लापरवाही इस दर्दनाक घटना की सबसे बड़ी वजह बनी।
इसी के चलते नोएडा अथॉरिटी के सीईओ लोकेश एम को उनके पद से हटाकर वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया है। हालांकि, पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया अभी जारी है। लोकेश एम को हटाने के फैसले पर एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि फाइलें तो पास हो गई थीं, लेकिन ज़मीन पर काम नहीं हुआ। उन्होंने साफ कहा कि काम की निगरानी करना कोई विकल्प नहीं, बल्कि सीईओ की कानूनी जिम्मेदारी है। यह गलती दफ्तर की नहीं, बल्कि ऊपरी स्तर की निगरानी में हुई चूक है। |