बीएचयू के प्रो. श्याम सुंदर को कालाजार उपचार में योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। प्रो. श्याम सुंदर को कालाजार के निदान और उपचार में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए इस बार पद्मश्री सम्मान दिया गया है। इसके पूर्व राष्ट्रपति द्वारा \“विजिटर पुरस्कार\“ और \“डा. पीएन राजू ओरेशन\“ सम्मान से सम्मानित किया गया है। वे बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS) के मेडिसिन विभाग में प्रसिद्ध प्रोफेसर हैं। प्रो. श्याम ने लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी की एक खुराक से कालाजार के उपचार की विधि विकसित की है, जो कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा मान्यता प्राप्त है।
उनके द्वारा विकसित की गई एकल खुराक लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी को कालाजार नियंत्रक कार्यक्रम में भारत में उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने कालाजार के उपचार में मल्टी ड्रग थेरेपी का सफल परीक्षण भी किया, जिसे डब्ल्यूएचओ ने अनुमोदित किया। पेरेमोमाइसीन और मिल्टेफोसीन दवा का संयोजन अब राष्ट्रीय नियंत्रण कार्यक्रम के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रो. श्याम ने कालाजार के उपचार के लिए पहली बार प्रभावी दवा मिल्टेफोसीन भी विकसित की है। यह दवा भारत, नेपाल और बांग्लादेश में कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई है और अब यह दवा विश्व स्तर पर उपयोग की जा रही है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आरके-39 स्ट्रीप जाच का परीक्षण भी किया, जो कालाजार के निदान में एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्रो. श्याम सुंदर का कार्य न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। उनके अनुसंधान और विकास ने कालाजार के उपचार में एक नई दिशा प्रदान की है, जिससे लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है। उनकी उपलब्धियों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक नई उम्मीद जगाई है और यह दर्शाता है कि कैसे वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार से गंभीर बीमारियों का समाधान निकाला जा सकता है।
प्रो. श्याम का यह योगदान न केवल चिकित्सा विज्ञान में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत है। उनके कार्यों से यह स्पष्ट होता है कि समर्पण और मेहनत से किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है। उनके अनुसंधान से कालाजार के खिलाफ लड़ाई में एक नई उम्मीद जगी है, जो आने वाले समय में और भी प्रभावी साबित होगी। |
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