डा. शिवराज सिंह व डा. मनीषा तेवतिया। सौ. मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र
जागरण संवाददाता, मेरठ। बोर्ड परीक्षाओं के समय परीक्षार्थियों पर काफी दबाव होता है। वे परीक्षा की बेहतर तैयारियों को लेकर भी दबाव में रहते हैं। इसके साथ ही अभिभावकीय दबाव का भी सामना करना पड़ता है, क्योंकि अपने बच्चों से अभिभावकों की भी काफी अपेक्षाएं होती हैं। वहीं, बोर्ड परीक्षा में कई बार अभिभावक अपेक्षा भी ज्यादा कर लेते हैं।
पीएमश्री राजकीय इंटर कालेज परिसर स्थित मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र की मंडलीय मनोवैज्ञानिक डा. मनीषा तेवतिया व मनोविज्ञान केंद्र के प्रवक्ता डा. शिवराज सिंह का कहना है कि परीक्षा के समय अभिभावकों को भी बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्हें यह कहकर प्रोत्साहित करना चाहिए कि हमें आप पर पूरा भरोसा है, जो भी परिणाम आएगा हम साथ हैं। ऐसा करने से परीक्षार्थी परीक्षा भवन में जाकर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे। दोनों मनोविज्ञानियों ने वेबिनार के माध्यम से अभिभावकों एवं परीक्षार्थियों के लिए अहम सुझाव दिए।
डा. मनीषा तेवतिया एवं डा. शिवराज सिंह का कहना है कि बोर्ड परीक्षाओं के समय परीक्षार्थियों पर अपनी पढ़ाई का दबाव तो होता ही है, लेकिन कई बार माता-पिता की अपेक्षाएं भी उनके मन पर अतिरिक्त भार डालती है। इसे ही अभिभावकीय दबाव कहा जाता है। यह दबाव अक्सर अनजाने में होता है। वैसे इसका उद्देश्य बच्चों का भला ही होता है, लेकिन यदि इसे सही तरीके से नहीं संभाला गया तो यह उनकी पढ़ाई और मानसिक संतुलन दोनों को भी प्रभावित कर सकता है।
क्या होता है अभिभावकीय दबाव
बार-बार तुलना करना, अंकों को ही सफलता का पैमाना मानना। अथवा यह कहना कि “पूरा भविष्य इसी परीक्षा पर निर्भर है” ये सभी बातें बच्चे के मन में डर और चिंता बढ़ा देती हैं। इससे परीक्षार्थी अधिक मेहनत तो करते हैं, लेकिन उनका आत्मविश्वास कम हो जाता है।
दबाव और प्रेरणा में अंतर समझें।
दबाव डर पैदा करता है, प्रेरणा आत्मविश्वास बढ़ाती है
दबाव डर पैदा करता है। साथ ही प्रेरणा आत्मविश्वास बढ़ाती है। माता-पिता यदि बच्चों को यह विश्वास दिलाएं कि मेहनत महत्वपूर्ण है, केवल परिणाम नहीं, तो बच्चों का मन शांत रहता है। नियंत्रण वाले और बिना नियंत्रण वाले विषय अलग करें। बोर्ड परीक्षार्थी यह समझें कि उनके नियंत्रण में पढ़ाई, समय प्रबंधन, अभ्यास और नींद है। वहीं, उनके नियंत्रण में यह नहीं है। दूसरों की अपेक्षाएं, तुलना, परिणाम। इस अंतर को समझने से मानसिक बोझ कम होता है।
परीक्षा के दौरान माता-पिता से संवाद करें
छात्र-छात्राओं को चाहिए कि वे परीक्षा के दौरान माता-पिता से संवाद करें। शांति और सम्मान के साथ अपनी बात रखें, जैसे- “मुझे आपकी चिंता समझ आती है, लेकिन डर की वजह से मेरी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। मुझे आपके सहयोग की जरूरत है।
तुलना से दूरी बनाएं
हर बच्चा अलग होता है। किसी और के अंकों से स्वयं को आंकना तनाव बढ़ाता है। अपनी पिछली तैयारी से तुलना करना अधिक सकारात्मक होता है।
परीक्षा से पहले मन को शांत करने की तकनीक
मनोविज्ञानियों ने श्वसन की सरल तकनीक भी बताई। बताया कि गहरी सांस लें। कुछ सेकंड रोकें और फिर उसको धीरे-धीरे छोड़ें। यह अभ्यास परीक्षा से पहले घबराहट को कम करने में मदद करता है।
अभिभावकों के लिए विशेष संदेश
माता-पिता यदि बच्चों से यह कहें कि हमें तुम पर भरोसा है, जो भी परिणाम होगा, हम साथ हैं। ऐसा करने से बच्चे भावनात्मक रूप से मजबूत बनते हैं और बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं। बोर्ड परीक्षाएं जीवन का एक पड़ाव हैं। अंतिम मंजिल नहीं। यदि इस समय घर का माहौल सहयोगात्मक और सकारात्मक हो तो बच्चे न केवल बेहतर अंक ला सकते हैं, बल्कि मानसिक रूप से भी स्वस्थ रह सकते हैं। परीक्षा के समय सकारात्मक संवाद, भरोसा और समझ सबसे महत्वपूर्ण है। यही परीक्षा के समय सबसे बड़ी सफलता की कुंजी है। |