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बरहमपुर सर्कल जेल में कैदियों के हुनर की बढ़ी मांग, 2025 में मेड-इन-जेल उत्पादों की बिक्री हुई दोगुनी

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बरहमपुर सर्कल जेल। (जागरण)



जागरण संवाददाता, अनुगुल। ओडिशा के बरहमपुर सर्कल जेल में बंद कैदियों द्वारा तैयार किए जा रहे विभिन्न उत्पादों की बिक्री वर्ष 2025 में दोगुनी हो गई है।

जेल प्रशासन के अनुसार, उत्पादों की गुणवत्ता, उचित मूल्य और प्रमाणन मिलने के बाद लोगों का भरोसा लगातार बढ़ा है, जिसका सीधा असर बिक्री पर पड़ा है।

जेल में कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से कपड़ा, घरेलू उपयोग और खाद्य सामग्री का उत्पादन कराया जा रहा है। कपड़ा इकाई में बेड-शीट, तौलिया, शर्टिंग कपड़ा, जेल ड्रेस और स्कार्फ तैयार किए जा रहे हैं।

वहीं, प्लास्टिक और अन्य इकाइयों में पानी के ड्रम, चावल रखने की ट्रे, बाल्टी, मग, सफाई उपकरण और कर्ब कंपोस्ट बनाया जा रहा है। खाद्य इकाई में आटा, बेसन, हल्दी पाउडर, रागी पाउडर, छतुवा और सरसों का तेल तैयार किया जा रहा है।

जेल अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2024 में इन उत्पादों की बिक्री से 6.95 लाख रुपये की आय हुई थी, जबकि 2025 में यह बढ़कर 14.53 लाख रुपये पहुंच गई। इसमें 7.97 लाख रुपये गैर-खाद्य और 6.56 लाख रुपये खाद्य वस्तुओं की बिक्री से प्राप्त हुए। कुल उत्पादन मूल्य भले ही 2024 के 47.39 लाख रुपये से घटकर 2025 में 37.54 लाख रुपये रहा हो, लेकिन खुले बाजार में बिक्री और मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

टेक्सटाइल से जुड़े उत्पादों की गुणवत्ता को देखते हुए बरहमपुर सर्कल जेल से तैयार बेड-शीट, तौलिए और जेल ड्रेस गंजम जिले के अलावा राज्य की 22 अन्य जेलों को भी सप्लाई किए जा रहे हैं। इससे न सिर्फ उत्पादन बढ़ा है, बल्कि कैदियों के कौशल में भी निरंतर सुधार हो रहा है।

पहले जेल परिसर तक आकर सामान खरीदने में लोग संकोच करते थे, लेकिन अब बाहर स्थापित बिक्री केंद्र पर आम लोग सहजता से मेड-इन-जेल उत्पाद खरीद रहे हैं। खाद्य वस्तुओं को एफएसएसएआई से प्रमाणन मिलने के बाद उपभोक्ताओं का भरोसा और मजबूत हुआ है।

बढ़ती मांग को देखते हुए जेल प्रशासन शहर के किसी प्रमुख स्थान पर दूसरा बिक्री आउटलेट खोलने की तैयारी में है। इसके लिए बरहमपुर नगर निगम से स्थान उपलब्ध कराने का अनुरोध किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इन उत्पादों तक पहुंच सकें।

जेल प्रशासन का कहना है कि यह पहल कैदियों के सुधार और पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। इससे एक ओर कैदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता का अवसर मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर जेल की सुधारात्मक गतिविधियों को आर्थिक मजबूती भी मिल रही है।
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