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मुंबई की सड़कों में पिता करते थे मोची का काम, बेटे ने बनाई अरबों की कंपनी, L&T से Mazagon Dock तक इनके क्लाइंट

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मुंबई की सड़कों में पिता करते थे मोची का काम, बेटे ने बनाई अरबों की कंपनी, L&T से Mazagon Dock तक इनके क्लाइंट



नई दिल्ली। भारत सरकार ने वर्ष 2026 के लिए 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है। इन पुरस्कारों में पांच पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं। पुरस्कार विजेताओं में 19 महिलाएं हैं और 16 को मरणोपरांत सम्मान प्रदान किया जा रहा है। इन्हीं पुरस्कारों में एक ऐसे बिजनेसमैन का नाम है जिसके बारे में पढ़कर आप भी सैल्यूट करेंगे।  

ये कहानी है जज्बे की, मेहनत की, संघर्ष की, कुछ बड़ा करने की ललक की और इतिहास रचने की। ये कहानी है एक मोची के बेटे। ये कहानी है उस बेटे की जिसके पिता कभी मुंबई की सड़कों पर जूते सिलने का काम करते थे। ये कहानी है उस दलित परिवार के बच्चे की जिसने सभी बेड़ियों को तोड़ते हुए एक बड़ा मुकाम हासिल किया। मुकाम ऐसा की भारत सरकार को भी पद्म श्री पुरस्कार की घोषणा में इनका नाम लेना पड़ा। ये कहानी है DAS Offshore Engineering Pvt. Ltd को फर्श से अर्श तक ले जाने वाले वा इसके फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर Ashok Khade की।
गरीबी में बीता बचपन, भूखे पेट भी सोना पड़ा

अशोक का जन्म महाराष्ट्र के सांगली जिले के पेड नामक गांव में हुआ था। दलित समाज से आने वाले अशोक खाड़े के पिता मोची थे। वह मुंबई के हलचल भरे शहर में एक पेड़ के नीचे काम करता करते थे।  

चमार समुदाय से आने वाले अशोक के पिता का पारंपरिक काम मृत जानवरों की खाल उतारना था। उनकी मां को ऊंची जाति के भूमि मालिकों के खेतों में खेतिहर मजदूर के रूप में काम करना पड़ता था। सामाजिक बहिष्कार से लेकर अवसरों की कमी तक, उनके परिवार को हर कदम पर भेदभाव का सामना करना पड़ा।

अशोक 6 भाई बहन थे। उनके पिता की इतनी आय नहीं थी कि वो सही से अपने बच्चों का पालन पोषण कर पाएं। आलम ये था कि कभी कभी पूरे परिवार को बिना खाना खाए ही सोना पड़ता था।  

अशोक ने इकोनॉमिक टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में कहा था, “मेरे पिता मुंबई में एक मोची के रूप में काम करते थे। आप अभी भी उस पेड़ को पा सकते हैं जिसे उन्होंने चित्रा टॉकीज के पास लगाया था और अपने व्यापार को चलाया था।“
गांव से निकल मुंबई पहुंचे अशोक खाड़े

अशोक ने जीवन में बहुत पहले ही शिक्षा के महत्व को महसूस कर लिया था। उन्होंने विभिन्न सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की, और 10 वीं कक्षा पूरी करने के बाद, अपने पिता और बड़े भाई के साथ मुंबई चले गए। तब तक उनका भाई सरकारी स्वामित्व वाली जहाज निर्माण कंपनी मझगांव डॉकयार्ड में वेल्डर के रूप में काम कर रहा था। अशोक अपने भाई के साथ एक प्रशिक्षु के रूप में शामिल हुए।

उन्होंने 1975 में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स में एक प्रशिक्षु ड्राफ्ट्समैन के रूप में काम करना शुरू किया, जहां उन्होंने अपतटीय रखरखाव, निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण में कौशल हासिल किया।

अशोक खाड़े ने काम करते हुए मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा भी पूरा किया।

मझगांव डॉक (1975-1992) में लगभग 17 वर्षों के बाद, अशोक खाडे और उनके दो भाइयों, दत्ता और सुरेश ने अपना खुद का इंजीनियरिंग व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया।
अशोक खाड़े ने खड़ा किया खुद का बिजनेस

अशोक खाड़े 1995 में DAS Offshore की स्थापना की, कंपनी का नाम तीन भाइयों (दत्ता, अशोक, सुरेश) के आद्याक्षर से आया है।
अशोक खाड़े की कंपनी आज 4,500 लोगों को रोजगार देती है और इसका वार्षिक कारोबार 500 करोड़ रुपये से अधिक है।

ONGC, लार्सन एंड टुब्रो (L&T), इंडियन ऑयल (Indian Oil Corporation Ltd.), एचपीसीएल, केयर्न (वेदांता), ब्रिटिश गैस, NOCC, एस्सार, हुंडई हेवी इंडस्ट्रीज, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (Mazagon Dock Shipbuilders) जैसी कंपनियां DAS Offshore Engineering Pvt. Ltd.  की क्लाइंट्स रह चुकी हैं। इनमें से कुछ अभी भी इसकी क्लाइंट हैं।

डीएएस ऑफशोर ने इन दिग्गजों के साथ तेल-गैस, अपतटीय निर्माण, पाइपलाइन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में काम किया है। इन ग्राहकों की सूची कंपनी की तकनीकी क्षमता, विश्वास और मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड को दर्शाती है।

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