search
 Forgot password?
 Register now
search

करुणा के बिना कानून अत्याचार बन जाता है, कानून के बिना करुणा अराजकता : सीजेआई

Chikheang 1 hour(s) ago views 801
  

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत। (पीटीआई)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने रविवार को कहा कि करुणा के बिना कानून अत्याचार बन जाता है और कानून के बिना करुणा अराजकता का कारण बनती है।

मादक पदार्थों के दुरुपयोग पर गोवा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के 30 दिन के विशेष जागरूकता अभियान के समापन समारोह को संबोधित करते हुए सीजेआइ ने कहा कि हमें यह समझना चाहिए कि नशीले पदार्थों का दुरुपयोग केवल आपराधिक समस्या नहीं है। यह एक सामाजिक, मनोवैज्ञानिक एवं चिकित्सकीय समस्या भी है, जिससे निपटने के लिए प्रतिशोधात्मक बयानबाजी नहीं, बल्कि परामर्श देने जैसे कदमों की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों के दुरुपयोग पर महीने भर चला यह अभियान इस भावना को स्पष्ट रूप से दर्शाने में सफल रहा है। मैं विधि व्यवस्था और सामाजिक परिवर्तन के बीच महत्वपूर्ण अंतर्संबंध पर भी बात करना चाहूंगा। पिछले चार दशक में मैंने हमारी न्याय व्यवस्था का विकास देखा है। मैंने इसे यह पहचानते देखा है कि करुणा के बिना कानून अत्याचार बन जाता है और कानून के बिना करुणा अराजकता पैदा करती है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि नशे की समस्या शोर या चेतावनी के साथ नहीं आती। यह हमारे घरों, कक्षाओं और समुदाय में चुपचाप प्रवेश करती है और संभावनाओं से भरे भविष्य को खोखला कर देती है। नशीले पदार्थों का दुरुपयोग केवल व्यक्तियों को नहीं, बल्कि समाज को भी बर्बाद कर देता है।
न्याय एक जीवंत संस्था है, जिसे संतुलन बनाए रखना चाहिए

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने रविवार को कहा कि न्याय एक जीवंत संस्था है, जिसे निरंतरता और परिवर्तन के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय विधि सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने जोर दिया कि कानून को न तो परिवर्तन का विरोध करना चाहिए और न ही बिना सोचे-समझे नई बातों को अपनाना चाहिए। जो कानून बदलाव को स्वीकार नहीं करता, वह शुद्ध नहीं रह जाता।

वहीं, जो कानून बिना सोचे-समझे हर नई बात को अपना लेता है, वह भी अपनी नैतिक सत्ता को खोने का जोखिम उठाता है। प्रत्येक विधि प्रणाली सदियों के संघर्ष, बहस, समझौते और नैतिक साहस से प्राप्त विरासत है।

यह सवाल हमेशा बना रहेगा कि एक ऐसी दुनिया में न्याय अपने मूल सिद्धांतों पर कैसे कायम रह सकता है, जो कभी स्थिर नहीं रहती। यह जिज्ञासा ही मुझे न्याय के विषय की ओर ले जाती है, जो समय की कसौटी पर खरा उतरता है, बदलावों से परखा जाता है और सेवा करने वालों के सामूहिक अनुशासन से कायम रहता है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
like (0)
ChikheangForum Veteran

Post a reply

loginto write comments
Chikheang

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1510K

Credits

Forum Veteran

Credits
157602

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com