'वेदप्रताप वैदिक को लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी समर्थक माना जाता है। यह एक सामान्य सी बात है जिसका कोई नोटिस लेने की जरूरत नहीं समझी गई। श्री वैदिक 'पीटीआई भाषा' व 'नवभारत टाइम्स' में संपादक रह चुके हैं, लेकिन इधर कुछ वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता में नहीं हैं। उनका एक कॉलम अवश्य समय-समय पर कुछ पत्रों में प्रकाशित होता है। संघ और भाजपा के करीबी होने के कारण इतना अवश्य है कि छत्तीसगढ़ जैसे भाजपा शासित राज्य में वे साल में एक-दो बार यहां शासकीय-अशासकीय कार्यक्रमों में आ जाते हैं। इसके अलावा पत्रकार हलकों में उनकी कोई खास चर्चा नहीं होती।'
'हां! जब से बाबा रामदेव का 'कांग्रेस हटाओ' आंदोलन प्रारंभ हुआ तब से वे टीवी के परदे पर बाबा के साथ अक्सर दिखाई देने लगे थे। उन्होंने बाबा की सभाओं में जोशीले भाषण भी दिए तथा उनकी ओर से वे टी.वी. की बहसों में भी आए। इससे प्रेक्षकों की यह धारणा बनी कि वे बाबा रामदेव के विश्वस्त अथवा समर्थक हैं। लेकिन वैदिकजी ऐसा कहने का बुरा मानते हैं। मुझसे उन्होंने कहा कि वे बाबा रामदेव के लिए पितृतुल्य हैं। यह कथन, हो सकता है कि वास्तविक हो और संभव है कि इसमें आत्मप्रशंसा का पुट हो! जो भी हो, इस नाजुक घड़ी में बाबा रामदेव ने उनका साथ ठीक से निभाया है, यह कहकर कि वे शायद हाफिज सईद का हृदय परिवर्तन करने के लिए उससे मिलने गए होंगे। बाबा की इस मासूमियत पर भला कौन न फिदा हो जाए! कितना अच्छा होता कि वे वैदिकजी को कालेधन पर बैठे तक्षकों का हृदय परिवर्तन करने की प्रेरणा या सलाह देते तो उनका एक और मिशन पूरा हो जाता।'
(देशबन्धु में 17 जुलाई 2014 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2014/07/blog-post_16.html

DB Desk
वेदप्रताप वैदिकस्वयंसेवक संघभारतीय जनता पार्टी
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