मैनचेस्टर: भारत और इंग्लैंड के बीच मैनचेस्टर में खेले गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भारतीय क्रिकेट को एक नया सितारा मिला। महज 15 साल और 99 दिन की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने भारतीय टीम के लिए पदार्पण कर इतिहास रच दिया। इसके साथ ही वह भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गए। हालांकि उनकी पहली पारी लंबी नहीं चल सकी, लेकिन उन्होंने अपने आक्रामक अंदाज से भविष्य की बड़ी संभावनाओं की झलक जरूर दिखा दी।
10 गेंदों में 14 रन, दो छक्कों से बटोरी सुर्खियां
बाएं हाथ के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय पारी में 10 गेंदों पर 14 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर और जोश टंग की गेंदों पर एक-एक शानदार छक्का जड़कर आत्मविश्वास का परिचय दिया। हालांकि उनकी पारी ज्यादा देर तक नहीं चल सकी। पांचवें ओवर की पांचवीं गेंद पर ऑफ स्पिनर विल जैक्स ने उन्हें चकमा दिया। ऑफ स्टंप के बाहर फेंकी गई धीमी गेंद पर वैभव कट शॉट खेलने के प्रयास में क्रीज से बाहर निकल आए और विकेटकीपर जोस बटलर ने उन्हें स्टंप कर दिया।
गावस्कर ने शॉट चयन पर जताई राय
भारत के पूर्व कप्तान और महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने वैभव के आउट होने के तरीके पर अपनी प्रतिक्रिया दी। सोनी स्पोर्ट्स पर बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जिस गेंद पर वैभव ने कट शॉट खेलने की कोशिश की, वह उनके स्वाभाविक खेल का हिस्सा नहीं था। गावस्कर के अनुसार, वैभव की सबसे बड़ी ताकत कवर ड्राइव है और उन्हें अपने मजबूत शॉट्स पर अधिक भरोसा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा बल्लेबाज के पास बेहतरीन प्रतिभा है और अनुभव के साथ वह बेहतर निर्णय लेना सीखेंगे।
डेब्यू से पहले भी जताया था भरोसा
मैच के दौरान कमेंट्री करते हुए सुनील गावस्कर ने वैभव को "भारत का बच्चा" बताते हुए कहा था कि यदि वह पहली ही गेंद से आक्रामक बल्लेबाजी करते हैं तो इसमें किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे देश की निगाहें इस युवा खिलाड़ी पर हैं और हर भारतीय चाहता है कि वह अच्छा प्रदर्शन करे। गावस्कर के मुताबिक, वैभव केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य की उम्मीद बन चुके हैं।
सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड पीछे छोड़ा
मैदान पर उतरते ही वैभव सूर्यवंशी ने भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित रिकॉर्ड में से एक अपने नाम कर लिया। उन्होंने 15 साल और 99 दिन की उम्र में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण कर सचिन तेंदुलकर के सबसे कम उम्र में भारत के लिए डेब्यू करने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। सचिन तेंदुलकर ने 16 वर्ष 205 दिन की उम्र में टेस्ट क्रिकेट और 16 वर्ष 238 दिन की उम्र में एकदिवसीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। वैभव का यह रिकॉर्ड भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक नई उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया है।
शुरुआती घबराहट के बाद दिखा आत्मविश्वास
अपनी पारी के दौरान वैभव को इंग्लैंड की तेज और उछाल भरी पिच पर शुरुआती कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अतिरिक्त उछाल के बावजूद उन्होंने दबाव में घबराने के बजाय सकारात्मक बल्लेबाजी की। जोफ्रा आर्चर के खिलाफ उन्होंने बैकवर्ड स्क्वायर लेग के ऊपर से शानदार स्कूप शॉट खेलकर छक्का लगाया, जबकि जोश टंग के खिलाफ लॉन्ग-ऑन के ऊपर लगाया गया उनका छक्का आईपीएल में दिखाई गई उनकी आक्रामक बल्लेबाजी की याद दिलाता है।
भारत ने बनाया चुनौतीपूर्ण स्कोर
वैभव की पारी भले ही छोटी रही, लेकिन भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवर में सात विकेट के नुकसान पर 190 रन का प्रतिस्पर्धी स्कोर खड़ा किया। मध्यक्रम में तिलक वर्मा ने अंतिम ओवरों में तेज बल्लेबाजी करते हुए टीम को मजबूत स्थिति तक पहुंचाया। हवादार परिस्थितियों और गेंदबाजों के लिए मददगार माहौल के बावजूद भारतीय बल्लेबाजों ने संयम और आक्रामकता का संतुलन बनाए रखा।
भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत
हालांकि वैभव सूर्यवंशी अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय पारी को बड़ी पारी में नहीं बदल सके, लेकिन उनकी निडर बल्लेबाजी और बड़े शॉट खेलने की क्षमता ने क्रिकेट विशेषज्ञों और प्रशंसकों का ध्यान आकर्षित किया। इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आत्मविश्वास के साथ खेलना इस बात का संकेत है कि भारतीय क्रिकेट को भविष्य के लिए एक प्रतिभाशाली बल्लेबाज मिल सकता है। आने वाले मैचों में उनसे और भी परिपक्व प्रदर्शन की उम्मीद की जाएगी।

Editorial Team
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