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अमरनाथ यात्रा के बीच बड़ी खबर, तेजी से पिघल र ...

deltin55 1970-1-1 05:00:00 views 84

जम्मू। अमरनाथ यात्रा 2026 के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगातार पवित्र गुफा की ओर पहुंच रही है। यात्रा के चौथे दिन तक हजारों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। इसी बीच हिम शिवलिंग के तेजी से पिघलने की खबर ने श्रद्धालुओं और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग की ऊंचाई अब घटकर करीब एक फीट के आसपास रह गई है। जून के अंत तक इसकी ऊंचाई लगभग पांच फीट बताई जा रही थी, जबकि मई के दौरान यह करीब सात फीट तक पहुंची थी।



हालांकि हिम शिवलिंग का आकार हर वर्ष मौसम, तापमान और प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान में वृद्धि और लगातार श्रद्धालुओं की आवाजाही का भी इसके आकार पर प्रभाव पड़ सकता है।
प्राकृतिक प्रक्रिया से हर साल बनता है हिम शिवलिंग

अमरनाथ गुफा में बनने वाला हिम शिवलिंग पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया का परिणाम है। वैज्ञानिक दृष्टि से इसे 'स्टैलेग्माइट' (Stalagmite) कहा जाता है। गुफा की छत से चूना पत्थर और अन्य खनिजों के बीच से रिसने वाला पानी अत्यधिक कम तापमान में धीरे-धीरे जमता है और समय के साथ शिवलिंग का आकार ग्रहण कर लेता है।




हर वर्ष मौसम के अनुसार इसका निर्माण और पिघलने की प्रक्रिया अलग-अलग रहती है। यही कारण है कि इसकी ऊंचाई में समय-समय पर बदलाव देखा जाता है।
तीन दिनों में 60 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

यात्रा के तीसरे दिन रविवार को लगभग 24 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में दर्शन किए। इसके साथ ही यात्रा शुरू होने के बाद पहले तीन दिनों में दर्शन करने वालों की संख्या करीब 60 हजार तक पहुंच गई। इस वर्ष भी श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।




सोमवार तड़के जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से 5,794 श्रद्धालुओं का नया जत्था कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रवाना हुआ। इस जत्थे में 1,211 महिलाएं, 21 बच्चे, 599 साधु और 76 साध्वियां शामिल हैं। इनमें से 3,490 श्रद्धालु पहलगाम मार्ग से जबकि 2,304 श्रद्धालु बालटाल मार्ग से पवित्र गुफा की ओर रवाना हुए।
दो मार्गों से जारी है यात्रा, ऊंचाई पर विशेष सतर्कता

अमरनाथ यात्रा दो प्रमुख मार्गों से संचालित की जा रही है। पारंपरिक पहलगाम मार्ग लगभग 48 किलोमीटर लंबा है, जबकि बालटाल मार्ग करीब 14 किलोमीटर का है, जिसे अपेक्षाकृत छोटा लेकिन अधिक कठिन और खड़ी चढ़ाई वाला रास्ता माना जाता है।




समुद्र तल से लगभग 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। प्रशासन लगातार मौसम की निगरानी कर रहा है ताकि यात्रा सुरक्षित बनी रहे।
वैध परमिट और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था पर प्रशासन का जोर

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे केवल वैध पंजीकरण और निर्धारित तिथि के अनुसार ही यात्रा करें। बिना अधिकृत परमिट के किसी भी श्रद्धालु को यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी।
यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए दोनों मार्गों पर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। नो-फ्लाई जोन, सीसीटीवी कैमरों की निगरानी, वॉच टावर, क्यूआर कोड आधारित पहचान पत्र और आरएफआईडी टैग जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। इसके साथ ही श्रद्धालुओं, वाहनों और सेवा प्रदाताओं की रियल-टाइम ट्रैकिंग की जा रही है ताकि यात्रा पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित बनी रहे।






National Desk



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