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खामेनेई की अंतिम विदाई में दिखे वे चेहरे जिन ...

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तेहरान। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम विदाई के दौरान एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने हालिया ईरान-इजराइल संघर्ष से जुड़ी कई अटकलों को फिर चर्चा में ला दिया। अंतिम यात्रा और श्रद्धांजलि समारोह में तीन ऐसे प्रमुख चेहरे सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए, जिनके बारे में युद्ध के दौरान विभिन्न रिपोर्टों में उनके मारे जाने के दावे किए गए थे। इनमें पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े अहमद वाहिदी और कुद्स (Quds) फोर्स के प्रमुख इस्माइल कानी (Esmail Ghaani) शामिल हैं। इन नेताओं की मौजूदगी के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि युद्ध के दौरान सामने आई कई मौतों की खबरें कितनी विश्वसनीय थीं। हालांकि, इस संबंध में अलग-अलग पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।




अहमदीनेजाद की मौजूदगी ने बढ़ाई चर्चा

पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद अंतिम यात्रा में शामिल होते हुए दिखाई दिए। हालिया संघर्ष के दौरान कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि वह इजराइली हमले में मारे गए हैं। उस समय इन दावों पर ईरान की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। बाद में कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि अमेरिका उन्हें भविष्य में ईरान के नेतृत्व के संभावित विकल्प के रूप में देख रहा है, हालांकि इन दावों की न तो अमेरिकी प्रशासन और न ही अहमदीनेजाद ने पुष्टि की। अब सार्वजनिक कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी ने उन सभी अटकलों को नया मोड़ दे दिया है।




अहमद वाहिदी भी सार्वजनिक रूप से आए सामने

आईआरजीसी से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी अहमद वाहिदी भी अंतिम संस्कार में मौजूद रहे। युद्ध के दौरान उनके मारे जाने की खबरें भी सामने आई थीं। उस समय ईरान ने इन दावों को खारिज किया था, लेकिन वाहिदी लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे। समारोह के दौरान पत्रकारों से बातचीत में वाहिदी ने कहा कि ईरान किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि देश को आत्मसमर्पण कराने की कोशिशें सफल नहीं होंगी और ईरान अपनी सुरक्षा तथा संप्रभुता की रक्षा करता रहेगा।




कुद्स फोर्स प्रमुख इस्माइल कानी भी दिखे

ईरान की कुद्स फोर्स के प्रमुख इस्माइल कानी भी अंतिम विदाई कार्यक्रम में शामिल हुए। संघर्ष के दौरान उनके मारे जाने की खबरें भी सामने आई थीं, जबकि बाद में उनके करीबी सूत्रों ने केवल घायल होने की बात कही थी। अब सार्वजनिक कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह जीवित हैं। कानी को ईरान की सैन्य और रणनीतिक संरचना में बेहद प्रभावशाली माना जाता है और उन्हें शीर्ष नेतृत्व का करीबी सहयोगी समझा जाता है।




तेहरान से कोम पहुंचा पार्थिव शरीर

तेहरान में आयोजित अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, भारी भीड़ के कारण अंतिम यात्रा कई स्थानों पर धीमी पड़ गई और कुछ समय के लिए जुलूस को रोकना भी पड़ा। श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद पार्थिव शरीर को धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पवित्र शहर कोम ले जाया गया। इसके बाद निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उन्हें उनके गृह नगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाना है।

मुज्तबा खामेनेई की अनुपस्थिति चर्चा में

समारोह में एक और महत्वपूर्ण बात यह रही कि अयातुल्लाह खामेनेई के पुत्र मुज्तबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों और संभावित खतरे को देखते हुए उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। युद्ध के बाद से मुज्तबा को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं। कुछ रिपोर्टों में उनके घायल होने का दावा किया गया था, जबकि ईरानी अधिकारियों ने कहा कि वह सुरक्षित हैं। उनकी अनुपस्थिति में वरिष्ठ धर्मगुरु अयातुल्लाह हसन नूरी द्वारा अंतिम धार्मिक रस्में संपन्न कराए जाने की जानकारी दी गई।

ईरानी नेतृत्व का सख्त संदेश

अंतिम विदाई के दौरान ईरानी नेतृत्व ने भी अपने राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी संदेश दिए। राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने कहा कि देश पूर्व सर्वोच्च नेता के सिद्धांतों और नीतियों पर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। वहीं सेना प्रमुख अमीर हातमी ने कहा कि जिन लोगों ने ईरान के नेताओं को निशाना बनाया है, उन्हें जवाबदेह ठहराने के प्रयास जारी रहेंगे। हालांकि उन्होंने किसी विशेष देश का नाम नहीं लिया।

विदेश मंत्री बोले- दबाव में नहीं होगी बातचीत

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अंतिम संस्कार के दौरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संदेश देते हुए कहा कि धमकियों और दबाव के माहौल में कोई भी व्यापक समझौता संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि बातचीत आगे बढ़ानी है तो पहले पहले से हुए समझौतों का सम्मान किया जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में अराघची ने कहा कि लाखों लोगों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि ईरानी जनता और उसकी सशस्त्र सेनाएं किसी भी प्रकार की बाहरी धमकी से डरने वाली नहीं हैं।

युद्ध से जुड़े दावों पर फिर उठे सवाल

अंतिम संस्कार में अहमदीनेजाद, अहमद वाहिदी और इस्माइल कानी की मौजूदगी ने हालिया संघर्ष के दौरान सामने आई कई खबरों की विश्वसनीयता पर बहस तेज कर दी है। युद्ध के दौरान दोनों पक्षों की ओर से लगातार दावे और प्रतिदावे किए गए थे, जिनमें से कई की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी थी। ऐसे में इन नेताओं का सार्वजनिक रूप से सामने आना इस बात की याद दिलाता है कि युद्धकालीन सूचनाओं को लेकर सावधानी बरतना और आधिकारिक तथा स्वतंत्र स्रोतों से पुष्टि करना कितना महत्वपूर्ण है।






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