मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान के नियंत्रण वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। नागरिक अधिकार संगठन जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर पाकिस्तान की सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है और मांगें पूरी न होने पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों की चेतावनी दी है।38 सूत्रीय मांगों को लेकर बढ़ा दबाव
जेएएसी ने मुजफ्फराबाद तक विशाल मार्च निकालने की घोषणा की है। संगठन की प्रमुख मांगों में पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को समाप्त करना, जलविद्युत परियोजनाओं की शर्तों की समीक्षा, आवश्यक वस्तुओं पर सब्सिडी और बिजली दरों में कमी शामिल है। संगठन का कहना है कि इन मुद्दों का सीधा संबंध क्षेत्र के लोगों के अधिकारों और आजीविका से है।
चुनाव से पहले गरमाया माहौल
क्षेत्र में आगामी चुनावों के मद्देनजर यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि प्रस्तावित प्रदर्शन स्थानीय राजनीति और चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।
दैनिक जीवन पर असर के दावे
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पिछले कुछ सप्ताहों से क्षेत्र में सुरक्षा प्रतिबंधों और अन्य प्रशासनिक उपायों के कारण आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। निवासियों ने इंटरनेट सेवाओं, बैंकिंग सुविधाओं और शैक्षणिक गतिविधियों में व्यवधान की शिकायत की है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठे सवाल
इस बीच, ब्रिटेन के कुछ राजनीतिक नेताओं ने भी पाकिस्तान की नीतियों और मानवाधिकार संबंधी मुद्दों पर चिंता व्यक्त की है। हालांकि, इन बयानों पर पाकिस्तान की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति को शांतिपूर्ण संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाना क्षेत्र की स्थिरता के लिए आवश्यक होगा।

National Desk
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