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ट्रंप बोले- ईरान के साथ युद्धविराम खत्म, लेक ...

deltin55 1970-1-1 05:00:00 views 58

वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ लागू युद्धविराम की अवधि अब समाप्त हो चुकी है, हालांकि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि ईरान ने अमेरिका से बातचीत का अनुरोध किया है और वाशिंगटन इसके लिए तैयार है। उनके अनुसार, युद्धविराम अब प्रभावी नहीं है, लेकिन तनाव कम करने के लिए संवाद के रास्ते खुले रखे जाएंगे। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों के बीच स्थायी समाधान की उम्मीद कर रहा है।




ईरान को ट्रंप की सख्त चेतावनी

कूटनीतिक बातचीत की बात करने के साथ ही ट्रंप ने ईरान को तीखी चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि यदि ईरान उनकी हत्या की कोशिश करता है या अमेरिका पर हमला करता है, तो उसे ऐसा जवाब मिलेगा, जैसा दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा होगा। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के पास बड़ी संख्या में मिसाइलें तैयार हैं और जरूरत पड़ने पर वह हजारों मिसाइलें दाग सकता है। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भी अपनी सैन्य तैयारियां पूरी कर ली हैं और आवश्यक होने पर जवाबी कार्रवाई के आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी हमले की स्थिति में ईरान को "पूरी तरह तबाह" कर दिया जाएगा।




बातचीत की उम्मीद बरकरार

अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप के बयान से यह संकेत मिलता है कि पिछले महीने बना युद्धविराम ढांचा अब प्रभावी नहीं रह गया है। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कूटनीतिक संपर्क जारी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति बताती है कि सैन्य तनाव और कूटनीतिक प्रयास समानांतर रूप से चल रहे हैं। दोनों पक्ष फिलहाल संवाद के विकल्प को पूरी तरह बंद नहीं करना चाहते।




स्विट्जरलैंड में वार्ता की खबरों से ईरान ने किया इनकार

अमेरिकी मीडिया प्लेटफॉर्म एक्सियोस ने दावा किया था कि अगले सप्ताह स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच नई वार्ता हो सकती है। हालांकि ईरान ने इन रिपोर्टों को खारिज कर दिया। आईआरजीसी से संबद्ध फार्स न्यूज एजेंसी ने कहा कि स्विट्जरलैंड या इस्लामाबाद में किसी प्रस्तावित बैठक को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में सामने आई खबरें निराधार हैं।




कतर और पाकिस्तान निभा रहे हैं मध्यस्थ की भूमिका

दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए कतर और पाकिस्तान लगातार मध्यस्थता के प्रयास कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कतर के प्रतिनिधियों ने हाल ही में तेहरान का दौरा कर बातचीत बहाल करने की संभावनाओं पर चर्चा की। वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी कतर के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल करना और संभावित सैन्य टकराव को रोकना है।

कतर और पाकिस्तान ने संयम बरतने की अपील की

कतर ने अमेरिका और ईरान दोनों से पिछले समझौतों का सम्मान करने और वार्ता जारी रखने की अपील की है। साथ ही उसने वैश्विक व्यापार के लिए अहम होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उधर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से टेलीफोन पर बातचीत कर क्षेत्रीय तनाव कम करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने दोनों देशों से पिछले महीने हुए समझौते (एमओयू) का पालन करने और विवादों का समाधान बातचीत के जरिए तलाशने की अपील की।

संयुक्त राष्ट्र में रूस ने पश्चिमी देशों पर लगाए आरोप

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की आपात बैठक में रूस ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की भूमिका पर सवाल उठाए। रूस की प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने ईरान के नागरिक ढांचे पर अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमलों का समर्थन किया, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ा।
फिलहाल शांत है पश्चिम एशिया का माहौल

हालिया रिपोर्टों के अनुसार शुक्रवार को पश्चिम एशिया में कोई नया बड़ा सैन्य हमला दर्ज नहीं किया गया। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि कूटनीतिक प्रयासों को अवसर देने के लिए सैन्य कार्रवाई को सीमित रखा जा रहा है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों का मानना है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास अब भी गहरा है और स्थिति किसी भी समय बदल सकती है। इसलिए क्षेत्र में शांति अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है।

ईरान का संदेश- आत्मसमर्पण से भी नहीं रुकेगा संघर्ष

इस बीच ईरान के संसद अध्यक्ष और वरिष्ठ वार्ताकार मोहम्मद बाकर गलीबाफ ने अमेरिका को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यदि वाशिंगटन पिछले महीने हुए समझौते से पीछे हटता है तो ईरान हर स्तर पर जवाब देने के लिए तैयार है। गलीबाफ ने कहा कि ईरान के आत्मसमर्पण कर देने से भी संघर्ष समाप्त नहीं होगा। इंडोनेशिया की पीपुल्स कंसल्टेटिव असेंबली के अध्यक्ष अहमद मुजानी से मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा कि तेहरान को अमेरिका की प्रतिबद्धताओं पर भरोसा नहीं है। उनके अनुसार, प्रभावी बातचीत वही देश कर सकता है, जो आवश्यकता पड़ने पर अपने हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करने की क्षमता भी रखता हो। उन्होंने अपने ये विचार टेलीग्राम पर भी साझा किए।

तनाव और कूटनीति साथ-साथ

अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा हालात यह दिखाते हैं कि सैन्य चेतावनियों और कूटनीतिक प्रयासों का दौर एक साथ चल रहा है। एक ओर ट्रंप युद्धविराम समाप्त होने और कड़ी जवाबी कार्रवाई की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मध्यस्थ देशों के प्रयास दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि दोनों देश संवाद को प्राथमिकता देते हैं या फिर पश्चिम एशिया एक बार फिर नए तनाव की ओर बढ़ता है।






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