कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रस्तावित ‘समान नागरिक संहिता, पश्चिम बंगाल-2026’ के मसौदा विधेयक की समीक्षा और उसे अंतिम रूप देने के लिए नौ सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। राज्य के न्यायिक विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है।विस्तृत परीक्षण के बाद विधानसभा में आएगा विधेयक
सरकार के अनुसार, समान नागरिक संहिता से जुड़े विषय सामाजिक, कानूनी और संवैधानिक दृष्टि से अत्यंत व्यापक एवं जटिल हैं। इसी कारण मसौदा विधेयक को विधानसभा में प्रस्तुत करने से पहले विशेषज्ञ समिति द्वारा उसका गहन परीक्षण कराया जा रहा है। समिति के गठन का निर्णय 2 जुलाई को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया था।
समिति में प्रशासन, शिक्षा, विधि और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनुभवी व्यक्तियों को शामिल किया गया है। जस्टिस देसाई के अलावा पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दुष्यंत नारियाला, सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह, गृह विभाग की प्रधान सचिव संघमित्रा घोष तथा अन्य विशेषज्ञ इसके सदस्य हैं।
एक समान कानूनी ढांचे पर होगा विचार
राज्य सरकार की अधिसूचना में कहा गया है कि यह पहल संविधान के नीति-निर्देशक सिद्धांतों के अंतर्गत अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप है। प्रस्तावित संहिता का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य व्यक्तिगत नागरिक मामलों के लिए सभी धर्मों और समुदायों पर समान रूप से लागू होने वाला कानूनी ढांचा तैयार करना है।
समिति विभिन्न प्रावधानों के सामाजिक प्रभाव, संवैधानिक वैधता और व्यावहारिक पहलुओं का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगी। इसके बाद संशोधित मसौदा राज्य विधानसभा में विचार के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल पर व्यापक जनचर्चा और विभिन्न समुदायों से संवाद की आवश्यकता होगी, ताकि प्रस्तावित कानून सर्वसमावेशी और व्यावहारिक बन सके। फिलहाल समिति के गठन के साथ ही पश्चिम बंगाल में यूसीसी को लेकर औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है।

National Desk
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