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कावेरी जल विवाद: 15 जुलाई की बैठक के बाद ही फै ...

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तमिलनाडु को पानी छोड़ने पर कर्नाटक का रुख बैठक के बाद साफ होगा  


  • कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र 6 अगस्त से शुरू
  • तिरुमाला मंदिर की पहली आरती अब जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को मिलेगी
बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार तमिलनाडु को कावेरी नदी का पानी छोड़ने के बारे में 15 जुलाई को होने वाली कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) की बैठक के बाद ही कोई फैसला लेगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र 6 अगस्त से शुरू होगा।   




अपने सरकारी आवास के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए सीएम डीके शिवकुमार ने कहा कि राज्य कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के सामने कर्नाटक की पीने के पानी की जरूरतों और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए अपना पक्ष मजबूती से रखेगा।  
उन्होंने कहा कि कावेरी मुद्दे पर उन्हें अपने किसानों के हितों की रक्षा करनी है, पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करनी है और तमिलनाडु के पानी के हिस्से के बारे में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना है।  




उन्होंने आगे कहा कि कावेरी प्राधिकरण की बैठक 15 जुलाई को होनी है, और वे वहां कर्नाटक का पक्ष रखेंगे, जिसके बाद फैसला सुनाया जाएगा।  
मांड्या के विधायकों की कावेरी का पानी छोड़ने की मांग पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि मांड्या और श्रीरंगपट्टनम के विधायकों ने जिले के प्रभारी मंत्री के साथ मिलकर इस मुद्दे पर उनसे मुलाकात की थी और अपनी राय रखी थी।  
उन्होंने कहा कि कावेरी प्राधिकरण की बैठक के बाद फैसला सुनाया जाएगा।  




शिवकुमार ने यह भी घोषणा की कि कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र 6 अगस्त से शुरू होने का प्रस्ताव है।  
कैबिनेट की बैठक और नई दिल्ली की अपनी प्रस्तावित यात्रा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वे एक दिन के लिए आधिकारिक काम से राष्ट्रीय राजधानी जाएंगे, और पार्टी नेता अगले कुछ दिनों में आगे की चर्चा के लिए तारीख तय करेंगे, जिसके बाद वे फिर से दिल्ली जाएंगे।  
राज्यपाल द्वारा कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के अध्यक्ष को निलंबित किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवकुमार ने कहा कि राज्यपाल ने आदेश जारी किया है और उन्होंने आयोग के सबसे वरिष्ठ सदस्य को अगले आदेश तक अध्यक्ष की जिम्मेदारियां निभाने का निर्देश दिया है।  




मुख्यमंत्री ने तिरुमाला मंदिर में पहली 'आरती' के फैसले के बारे में भी बात की।  
उन्होंने कहा कि पहली आरती प्राप्त करने का विशेषाधिकार ऐतिहासिक रूप से मैसूर के महाराजाओं के समय से ही कर्नाटक के पास रहा है। किसी तय सरकारी अधिकारी के बजाय, अब यह अवसर कर्नाटक के जन प्रतिनिधियों, जजों, सरकारी अधिकारियों, सांसदों, मेयरों, तहसीलदारों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को दिया जाएगा।  
उन्होंने आगे कहा कि यह सुविधा किसी खास राजनीतिक पार्टी तक सीमित नहीं होगी, और किसी भी पार्टी के जन प्रतिनिधि जो तिरुपति आएंगे, वे तय दिशानिर्देशों के अधीन इसके लिए पात्र होंगे। उन्होंने साफ किया कि यह फैसला सिर्फ पहली आरती तक ही सीमित था और बाकी सभी नियम और प्रक्रियाएं तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम प्रशासन के तहत ही चलेंगी।  
शिवकुमार ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद एच. हनुमंथप्पा को श्रद्धांजलि भी दी। उन्होंने उन्हें एक अनुभवी राजनेता बताया, जिन्होंने राज्य और देश, दोनों के लिए अहम योगदान दिया था।






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