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New Justice Statue In Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में न्याय की देवी की नई मूर्ति लगाई गई है. जिसमें आंखों से पट्टी भी हट गई है और हाथों में तलवार की

deltin55 2 hour(s) ago views 84
   
सुप्रीम कोर्ट में देवी न्याय की देवी की नई मूर्ति लगाई गई हैइस मूर्ति में कुछ बदलाव भी किए गए हैइस मूर्ति में न्याय की देवी की आंखों से पट्टी को हटा दिया गया हैसाथ ही उनके हाथ में अब तलवार की जगह संविधान की किताब दी गई हैये बदलाव भारत के चीफ जस्टिसडीवाई चंद्रचूड़ ने किए हैंइस बदलाव का मकसद ये बताना है कि भारत का कानून अंधा नहीं है

बता दें कि नई मूर्ति सुप्रीम कोर्ट के जजों की लाइब्रेरी में लगाई गई हैडीवाई चंद्रचूड़ ने खुद इस मूर्ति को बनाने का आदेश दिया थागौरतलब है कि इस मूर्ति में दिखाया गया अंधा कानून और सजा के प्रतीक आज के समय के हिसाब से नहीं थेइसीलिए ये बदलाव किए गएऐसे में सवाल ये उठता है कि भारत का कानून अंधा क्यों कहा जाता हैऔर पहले न्याय की देवी की आंखों पर पट्टी क्यों लगाई गई थीचलिए जानते हैं

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क्यों लगाई गई थी न्याय की देवी की आंखों पर पट्टी



न्याय के देवी की आंखों पर पहले पट्टी लगी हुई थीजिसका मतलब ये था कि कानून सभी के साथ एक जैसा व्यवहार करता हैइसके साथ ही न्याय की देवी के हाथों में तलवार थीजो ये बताता था कि कानून के पास ताकत हैवो गलत करने वालों को सजा दे सकता हैहालांकि नई मूर्ति में एक चीज हो जिसे नहीं बदला गया है और वो है तराजूनई मूर्ति के हाथ में अब भी तराजू रखा गया हैये बताता है कि न्यायलय किसी भी मामले में दोनों पक्षों की बात सुनकर ही फैसला लेता हैयानी तराजू संतुलन का प्रतीक है

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अंधा क्यों कहा जाता है भारत का कानून

भारत में न्याय की देवी के आंखों में पट्टी थीकई लोग इसका मतलब ये निकालते थे कि भारत का कानून अंधा हैजबकि इस पट्टी का मतलब था कि किसी को बिना देखे न्याय करनायानी जब किसी को देखकर न्याय किया जाता है तो उसे कई बार एक पक्ष में समझा जा सकता हैजबिक आंखों पर पट्टी बंधे होने का मतलब ये था कि न्याय की देवी हमेशा निष्पक्ष होकर न्याय करती हैंइस तरह जस्टिस की मूर्ति हमें ये याद दिलाती हैं कि सच्चा न्याय निष्पक्ष और बिना किसी भेदभाल के करना चाहिए


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