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बंगला साहिब से नानक प्याऊ तक... गतका दलों-निहंगों के करतब, दिल्ली में 556वां प्रकाश पर्व पर उत्साह

cy520520 2025-11-5 10:07:35 views 417
  

दिल्ली में सिखों का 556वां प्रकाश पर्व धूमधाम से मनाया गया।



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। सिख धर्म के संस्थापक और प्रथम गुरु, गुरु नानक देव का 556वां प्रकाश पर्व आज गुरुद्वारों में बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। नई दिल्ली के ऐतिहासिक गुरुद्वारों - बंगला साहिब, शीशगंज, रकाबगंज और बाला साहिब - को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। सभी छोटे-बड़े गुरुद्वारों में लंगर, शबद कीर्तन, सामूहिक प्रार्थना और विशेष दीवान के साथ भव्य आयोजन होंगे। रामधारी संगत सेवा समिति भी मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में एक भव्य गुरुपर्व कार्यक्रम का आयोजन करेगी। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
गुरुपर्व पर विशेष कार्यक्रम

गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के सदस्य सुदीप के अनुसार, इस पावन अवसर पर गुरुद्वारों में तीन दिवसीय अखंड पाठ का समापन होगा और गुरु नानक देव की शिक्षाओं से युक्त पवित्र पाठ का विशेष रूप से पाठ किया जाएगा। गुरुपर्व पर गुरुद्वारों में सामूहिक लंगर का आयोजन किया जाएगा, जहाँ सभी जातियों और धर्मों के लोग एक साथ बैठकर भोजन करेंगे। इस लंगर के आयोजन का उद्देश्य गुरु नानक देव जी के समानता और भाईचारे के संदेश को प्रतिबिंबित करना है।

प्रकाश पर्व से एक दिन पहले, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) ने एक विशाल और भव्य नगर कीर्तन का आयोजन किया। नगर कीर्तन गुरुद्वारा शीशगंज साहिब में अरदास (प्रार्थना) के बाद शुरू हुआ। पंज प्यारों के नेतृत्व में, पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब को फूलों से सजी पालकी में कीर्तन और भजनों के साथ फतेहपुरी से खारी बावली, नया बाजार चौक, आजाद मार्केट, पुल बंगश मेट्रो स्टेशन, रोशनारा रोड, चौक घंटाघर, शक्ति नगर चौक, राणा प्रताप बाग और बेबे नानकी चौक होते हुए देर शाम गुरुद्वारा नानक प्याऊ साहिब पर समापन हुआ।

भक्तों ने पालकी पर पुष्प वर्षा कर नगर कीर्तन का स्वागत किया। नगर कीर्तन के दौरान स्कूली बच्चों, गतका दलों और निहंग सिंह जत्थों ने ढोल की थाप पर हैरतअंगेज करतब दिखाए। इस अवसर पर दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका और महासचिव सरदार जगदीप सिंह काहलों ने कहा कि गुरु नानक देव जी उस समय धरती पर अवतरित हुए जब दुनिया कर्मकांड के अंधकार में डूबी हुई थी। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब ने दुनिया के कोने-कोने में चार उदासियाँ (आध्यात्मिक तीर्थयात्राएँ) कीं, गुरबाणी का संदेश फैलाया और लोगों को अज्ञानता के अंधकार से बाहर निकालने के लिए हज़ारों मील पैदल यात्रा की।
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