search
 Forgot password?
 Register now
search

क्या बढ़ जाएगा संसदीय समितियों का कार्यकाल? सांसदों की शिकायत पर विचार कर रही सरकार_deltin51

Chikheang 2025-9-28 06:06:34 views 1265
  क्या बढ़ जाएगा संसदीय समितियों का कार्यकाल?





डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार संसदीय स्थायी समितियों का कार्यकाल दो साल तक बढ़ाने पर विचार कर रही है। कुछ सांसदों ने शिकायत की है कि मौजूदा एक साल का कार्यकाल किसी भी सार्थक योगदान के लिए बहुत कम है। उम्मीद है कि सरकार लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन के साथ विचार-विमर्श के बाद इस संबंध में कोई निर्णय लेगी। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

संसदीय समितियों का नया कार्यकाल आमतौर पर सितंबर के अंत या अक्टूबर की शुरुआत में प्रारंभ होता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि इन समितियों का गठन किस तारीख को होता है। इन समितियों को अक्सर \“लघु संसद\“ कहा जाता है।


विपक्ष के कुछ सदस्यों ने किया था कार्यकाल बढ़ाने का अनुरोध

सूत्रों ने बताया कि कुछ सदस्यों ने सरकार से समितियों का कार्यकाल वर्तमान एक वर्ष से बढ़ाकर कम से कम दो वर्ष करने का अनुरोध किया था ताकि समितियां विचार-विमर्श के लिए चुने गए विषयों पर प्रभावी ढंग से विचार कर सकें। नई लोकसभा के गठन के तुरंत बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के परामर्श से इन समितियों का गठन किया जाता है। इन दलों को सदन में उनकी संख्या के अनुपात में इन समितियों की अध्यक्षता का दायित्व मिलता है।

new-delhi-city-general,New Delhi City news,JJ Clusters water supply,Har Ghar Jal Yojana,New Delhi Municipal Council,Jal Jeevan Mission Amrut 2,0,Delhi water crisis,Piped water connection,New Delhi development projects,Delhi Slum Development,December 2025 water target,Delhi news   
क्या है प्रक्रिया?

आमतौर पर नई लोकसभा के कार्यकाल की शुरुआत में मनोनीत अध्यक्ष हर साल समितियों के गठन के साथ पद पर बने रहते हैं, जब तक कि किसी राजनीतिक दल द्वारा बदलाव का अनुरोध न किया जाए। कई बार सदस्य किसी अन्य समिति का हिस्सा बनना चाहते हैं और ऐसे अनुरोधों पर संबंधित सदनों के पीठासीन अधिकारियों द्वारा सकारात्मक रूप से विचार भी किया जाता है।

विभाग-संबंधित 24 स्थायी समितियों में से आठ की अध्यक्षता राज्यसभा के सदस्य करते हैं, जबकि 16 का संचालन लोकसभा के सदस्य करते हैं। संसदीय प्रणाली में वित्तीय समितियां, तदर्थ समितियां और अन्य समितियां भी शामिल हैं जिनका गठन समय-समय पर विधेयकों और अन्य मुद्दों की जांच के लिए किया जाता है।



(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

यह भी पढ़ें- विपक्ष के इस सुझाव को अगर मोदी सरकार ने मान लिया तो शशि थरूर को होगा बड़ा फायदा

like (0)
ChikheangForum Veteran

Post a reply

loginto write comments
Chikheang

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1510K

Credits

Forum Veteran

Credits
157953

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com