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लखनऊ में बुलेट सवार दो छात्र तेज रफ्तार में बस में घुसे, एक की मौत; दूसरा घायल

cy520520 2025-11-8 02:07:29 views 1189
  



जागरण संवाददाता, लखनऊ। आशियाना सेक्टर एच स्थित स्टेला मैरिस स्कूल के बाहर शुक्रवार को तेज रफ्तार बुलेट सवार दो छात्र बस में जा घुसे। हेलमेट न पहने होने के कारण दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने 11वीं के छात्र 17 वर्षीय वैभव कुमार झा को मृत घोषित कर दिया। वहीं, पीछे बैठे शाश्वत की हालत गंभीर है। वहां, मौजूद लोगों ने बताया कि हेलमेट को वैभव ने हैंडल पर टांग रखा था। स्कूल प्रबंधन ने बताया कि बच्चों को पिकनिक ले जाने के लिए बसें बाहर खड़ी थी। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें


इंस्पेक्टर आशियाना छत्रपाल सिंह के मुताबिक वैभव मधुबन नगर इलाके रहने वाले थे। उनके पिता संतोष कुमार झा अधिवक्ता हैं। इकलौते बेटे की खबर मिलते ही मां कनकलता बेसुध हो गईं। पुलिस ने बताया कि शुक्रवार को स्कूल से सभी छात्रों को पिकनिक ले जाने के लिए तैयारी कर रहा था। उसी के लिए बस बुलाई गई थी, जो स्कूल के बाहर खड़ी थी।

बच्चे बस में बैठ रहे थे। तभी वैभव शाश्वत के साथ बुलेट से तेज रफ्तार में आया और बुलेट अनियंत्रित हो गई। जबतक कुछ समझ पाता उससे पहले ही वैभव बुलेट के साथ बस में जा घुसे। हादसे में वैभव और शाश्वत दोनों घायल हो गए। स्कूल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी और दोनों को लोकबंधु अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने सिर में गंभीर चोट लगने से वैभव को मृत घोषित कर दिया। वहीं, शाश्वत का इलाज चल रहा है।

उधर, हादसे के बाद भाग रहे बस चालक को स्थानीय लोगों ने दौड़ाकर पकड़ लिया। पुलिस ने बस चालक को हिरासत में ले लिया है। इंस्पेक्टर ने बताया कि घरवालों की तरफ से कोई तहरीर मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। हादसे के बाद से स्कूल प्रबंधन ने पिकनिक जाने कार्यक्रम निरस्त कर दिया गया। स्कूल में शोकसभा का आयोजन किया गया। सभी बच्चों और शिक्षकों ने वैभव को श्रद्धांजलि दी। विद्यार्थियों का कहना था कि वैभव बहुत मददगार था सबका। पढ़ाई में भी अच्छा था।

वैभव को आईपीएस बनाना चाहते थे मां-बाप


  

वैभव के माता-पिता बेटे को आइपीएस बनाना चाहते थे। उसे वर्दी में देखने का सपना था। वैभव से बहुत उम्मीद थी। उसने हाईस्कूल परीक्षा में उसने टाप कर परिवार का सिर गर्व से ऊंचा किया था। उसी के बाद जन्मदिन पर बुलेट दिलाई थी। छोटी बहन अनन्या भी उसी स्कूल में पढ़ती है और भाई की हर बात पर नाज करती थी। मां बेटे की तस्वीर को सीने से लगाए रोती रहीं, जबकि पिता सिर पर हाथ रखकर बैठे रहे।
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