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Kemdrum Yoga: कुंडली में कब बनता है केमद्रुम योग और कैसे पाएं इससे निजात?_deltin51

LHC0088 2025-9-29 01:36:32 views 1252
  Kemdrum Yoga: केमद्रुम योग के बेहद सरल उपाय





आनंद सागर पाठक, एस्ट्रोपत्री। केमद्रुम योग तब बनता है जब चंद्रमा से द्वितीय या द्वादश भाव में कोई ग्रह स्थित न हो। इन भावों में सूर्य और राहु-केतु की उपस्थिति का कोई महत्व नहीं होता।

कहा जाता है कि इस योग में जन्मा व्यक्ति स्वास्थ्य, धन, विद्या, बुद्धि, पत्नी, संतान और मानसिक शांति से वंचित होता है। यह योग राजसी परिवेश में जन्मे व्यक्ति को भी दरिद्र बना देता है। ऐसा जातक दुःख, विफलताओं, शारीरिक बीमारियों और अपमान का शिकार होता है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें



  

केमद्रुम योग मुख्य रूप से आर्थिक हानि और प्रतिष्ठा में गिरावट लाता है। यह ऐसा योग है जो जातक को दुःख और अपमान की ओर ले जाता है। जातक परिजात के अनुसार, कुछ अन्य ग्रह स्थितियां भी केमद्रुम योग का निर्माण करती हैं। केमद्रुम के ये अन्य रूप भी उतने ही अशुभ और दरिद्रता उत्पन्न करने वाले माने जाते हैं।

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यह रहे केमद्रुम योग बनाने वाले कारण

  • चंद्रमा लग्न या सप्तम भाव में स्थित हो और उस पर बृहस्पति की दृष्टि न हो।
  • अष्टकवर्ग में जिन स्थानों पर ग्रह बैठे हों वहां शुभ बिंदुओं की संख्या चार से कम हो और बाकी सभी ग्रह भी निर्बल हों।
  • चंद्रमा सूर्य के साथ युति में हो, किसी नीच ग्रह की दृष्टि में हो और अशुभ नवांश में स्थित हो।
  • चंद्रमा क्षीण (कृष्ण पक्ष का) हो, लग्न से अष्टम भाव में स्थित हो, पाप ग्रह के साथ युत या दृष्ट हो और जन्म रात्रि के समय हुआ हो।
  • चंद्रमा राहु-केतु की धुरी में स्थित हो और उस पर किसी पाप ग्रह की दृष्टि हो।
  • लग्न या चंद्रमा से चतुर्थ भाव में कोई पाप ग्रह स्थित हो।
  • चंद्रमा पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि हो जो ग्रह युद्ध में हार गया हो, और चंद्रमा राहु या केतु के साथ जुड़ा हो।
  • चंद्रमा तुला राशि में हो, किसी शत्रु ग्रह के नवांश में स्थित हो और किसी शत्रु या नीच ग्रह की दृष्टि में हो।
  • चंद्रमा किसी केंद्र या त्रिकोण भाव में हो, लेकिन शत्रु राशि या नीच नवांश में स्थित हो, और बृहस्पति चंद्रमा से षष्ठ, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित हो। इस स्थिति को आगे चलकर शकट योग भी कहा गया है।
  • चंद्रमा चर राशि में और चर नवांश में हो, नवांश में पाप ग्रह की राशि में हो, उस पर किसी शत्रु ग्रह की दृष्टि हो और बृहस्पति की दृष्टि न हो।
  • शनि और शुक्र, दोनों नीच, पाप या शत्रु ग्रहों की राशियों में स्थित हों  चाहे एक साथ हों या एक-दूसरे की दृष्टि में हों।
  • चंद्रमा क्षीण हो, नवांश में नीच स्थिति में हो, पाप ग्रह से युत हो और नवम भाव के स्वामी की दृष्टि में हो।
  • (पुनरावृत्ति) चंद्रमा क्षीण हो, नवांश में नीच स्थिति में हो, पाप ग्रह से युत हो और नवम भाव के स्वामी की दृष्टि में हो।
  • चंद्रमा क्षीण और नीच स्थिति में हो तथा जन्म रात्रि के समय हुआ हो।

केमद्रुम यो को भंग करने वाली स्थितियां

  • यदि लग्न से केंद्र स्थानों (पहला, चौथा, सातवां या दसवां भाव) में ग्रह मौजूद हों, तो केमद्रुम योग का प्रभाव खत्म हो जाता है और इसके स्थान पर एक अत्यंत शुभ कल्पद्रुम योग बन जाता है, जो जातक को सभी सुख-सुविधाएं प्रदान करता है।
  • चंद्रमा से केंद्र स्थानों में ग्रह मौजूद हों।
  • यदि सभी ग्रह चंद्रमा पर दृष्टि डाल रहे हों।
  • चंद्रमा या शुक्र किसी केंद्र भाव में स्थित हो और उन पर शुभ ग्रहों (बुध, बृहस्पति, शुक्र) की दृष्टि हो या वे उनके साथ युत हों।
  • यदि चंद्रमा बलवान हो और किसी केंद्र में स्थित हो, साथ ही किसी शुभ ग्रह से युत हो या दो शुभ ग्रहों के बीच स्थित हो और बृहस्पति उसे देख रहा हो।
  • चंद्रमा किसी शुभ ग्रह के साथ युत हो या दो शुभ ग्रहों के बीच स्थित हो और बृहस्पति की दृष्टि उस पर हो।
  • चंद्रमा नवमांश कुंडली में अपनी उच्च राशि में हो या किसी अत्यंत मित्र ग्रह की राशि में स्थित हो और बृहस्पति उसे देख रहा हो।
  • पूर्णिमा का चंद्रमा लग्न में स्थित हो और किसी शुभ ग्रह के साथ युत हो।
  • चंद्रमा दशम भाव में उच्च का हो और किसी शुभ ग्रह की दृष्टि में हो।
  • यदि जन्म के समय मंगल और बृहस्पति तुला राशि में हों, सूर्य कन्या राशि में हो और चंद्रमा मेष राशि में हो भले ही अन्य ग्रह चंद्रमा को न देख रहे हों तब भी केमद्रुम योग का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
  • चंद्रमा को स्वभाव से ही कमजोर माना जाता है। जब तक उसके पास किसी और ग्रह का सहारा न हो, तब तक उसका प्रभाव अशुभ हो सकता है।

समापन

केमद्रुम योग चंद्रमा की निर्बलता से जुड़ा एक अशुभ योग है, जो जीवन में मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक परेशानियाँ ला सकता है। लेकिन अगर कुंडली में शुभ ग्रहों की दृष्टि या युति हो, तो यह योग भंग हो जाता है। इसलिए घबराने की बजाय पूरी कुंडली का सही विश्लेषण और उचित उपाय जरूरी होते हैं।



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लेखक: आनंद सागर पाठक, Astropatri.com प्रतिक्रिया देने के लिए संपर्क करें: hello@astropatri.com

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