धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, गुरुवार 20 नवंबर को मार्गशीर्ष अमावस्या है। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति देव को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त गुरुवार का व्रत रखा जाता है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
गुरुवार का व्रत रखने से कुंडली में गुरु मजबूत होता है। गुरु मजबूत रहने से जातक को करियर और कारोबार में मनमुताबिक सफलता मिलती है। साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। अगर आप भी कुंडली में गुरु मजबूत करना चाहते हैं, तो गुरुवार के दिन पूजा के समय बृहस्पति देव के नामों का जप करें।
बृहस्पति देव के 108 नाम
ॐ गुरवे नमः
ॐ गुणाकराय नमः
ॐ गोप्त्रे नमः
ॐ गोचराय नमः
ॐ गोपतिप्रियाय नमः
ॐ गुणिने नमः
ॐ गुणवंतांश्रेष्ठाय नमः
ॐ गुरूनां गुरवे नमः
ॐ अव्ययाय नमः
ॐ जेत्रे नमः
ॐ जयंताय नमः
ॐ जयदाय नमः
ॐ जीवाय नमः
ॐ अनंताय नमः
ॐ जयावहाय नमः
ॐ अंगीरसाय नमः
ॐ अध्वरासक्ताय नमः
ॐ विविक्ताय नमः
ॐ अध्वरकृते नमः
ॐ पराय नमः
ॐ वाचस्पतये नमः
ॐ वशिने नमः
ॐ वश्याय नमः
ॐ वरिष्ठाय नमः
ॐ वाग्विचक्षणाय नमः
ॐ चित्तशुद्धिकराय नमः
ॐ श्रीमते नमः
ॐ चैत्राय नमः
ॐ चित्रशिखंडिजाय नमः
ॐ बृहद्रथाय नमः
ॐ बृहद्भानवे नमः
ॐ बृहस्पतये नमः
ॐ अभीष्टदाय नमः
ॐ सुराचार्याय नमः
ॐ सुराराध्याय नमः
ॐ सुरकार्यहितंकराय नमः
ॐ गीर्वाणपोषकाय नमः
ॐ धन्याय नमः
ॐ गीष्पतये नमः
ॐ गिरीशाय नमः
ॐ अनघाय नमः
ॐ धीवराय नमः
ॐ धीषणाय नमः
ॐ दिव्यभूषणाय नमः
ॐ धनुर्धराय नमः
ॐ दैत्रहंत्रे नमः
ॐ दयापराय नमः
ॐ दयाकराय नमः
ॐ दारिद्र्यनाशनाय नमः
ॐ धन्याय नमः
ॐ दक्षिणायन संभवाय नमः
ॐ धनुर्मीनाधिपाय नमः
ॐ देवाय नमः
ॐ धनुर्बाणधराय नमः
ॐ हरये नमः
ॐ सर्वागमज्ञाय नमः
ॐ सर्वज्ञाय नमः
ॐ सर्ववेदांतविद्वराय नमः
ॐ ब्रह्मपुत्राय नमः
ॐ ब्राह्मणेशाय नमः
ॐ ब्रह्मविद्याविशारदाय नमः
ॐ समानाधिकनिर्मुक्ताय नमः
ॐ सर्वलोकवशंवदाय नमः
ॐ ससुरासुरगंधर्ववंदिताय नमः
ॐ सत्यभाषणाय नमः
ॐ सुरॆंद्रवंद्याय नमः
ॐ देवाचार्याय नमः
ॐ अनंतसामर्थ्याय नमः
ॐ वेदसिद्धांतपारंगाय नमः
ॐ सदानंदाय नमः
ॐ पीडाहराय नमः
ॐ वाचस्पतये नमः
ॐ पीतवाससे नमः
ॐ अद्वितीयरूपाय नमः
ॐ लंबकूर्चाय नमः
ॐ प्रकृष्टनेत्राय नमः
ॐ विप्राणांपतये नमः
ॐ भार्गवशिष्याय नमः
ॐ विपन्नहितकराय नमः
ॐ बृहस्पतये नमः
ॐ सुराचार्याय नमः
ॐ दयावते नमः
ॐ शुभलक्षणाय नमः
ॐ लोकत्रयगुरवे नमः
ॐ सर्वतोविभवे नमः
ॐ सर्वेशाय नमः
ॐ सर्वदाहृष्टाय नमः
ॐ सर्वगाय नमः
ॐ सर्वपूजिताय नमः
ॐ अक्रोधनाय नमः
ॐ मुनिश्रेष्ठाय नमः
ॐ नीतिकर्त्रे नमः
ॐ जगत्पित्रे नमः
ॐ सुरसैन्याय नमः
ॐ विपन्नत्राणहेतवे नमः
ॐ विश्वयोनये नमः
ॐ अनयोनिजाय नमः
ॐ भूर्भुवाय नमः
ॐ धनदात्रे नमः
ॐ भर्त्रे नमः
ॐ जीवाय नमः
ॐ महाबलाय नमः
ॐ काश्यपप्रियाय नमः
ॐ अभीष्टफलदाय नमः
ॐ विश्वात्मने नमः
ॐ विश्वकर्त्रे नमः
ॐ श्रीमते नमः
ॐ शुभग्रहाय नमः
यह भी पढ़ें- Margashirsha Amavasya 2025: मार्गशीर्ष अमावस्या की रात करें ये दुर्लभ उपाय, नाराज पितृ होंगे खुश
यह भी पढ़ें- Margashirsha Amavasya 2025: इन मंत्रों के जप से करें पितरों को प्रसन्न, खुशियों से भर जाएगा घर-आंगन
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।