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होटल मैनेजर अर्णव दुग्गल की रहस्यमयी मौत की जांच करेगी CBI, HC ने दिल्ली पुलिस की जांच पर उठाए सवाल

cy520520 2025-11-28 23:08:14 views 671
  



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 वर्षीय होटल मैनेजर अर्णव दुग्गल की वर्ष 2017 में हुई रहस्यमयी मौत की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह आदेश दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आई गंभीर कमियों और संदिग्ध आचरण पर कड़ी टिप्पणी करते हुए दिया। कोर्ट ने सीबीआई को यह भी निर्देश दिया है कि वो दिल्ली पुलिस की जांच में हुई सभी चूकों और जिम्मेदारी तय करने पर भी रिपोर्ट दें। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

न्यायमूर्ति तुषार राव गेड़ेला ने कहा कि विज्ञान और फोरेंसिक तकनीक में हुई प्रगति ने दुनिया भर में दशकों पुराने मामलों को सुलझाया है, इसलिए सच की खोज करने में कभी देर नहीं होती। उन्होंने अमेरिका के दो कुख्यात सीरियल किलर गोल्डन स्टेट किलर जोसेफ डिएंजेलो और ग्रीन रिवर किलर गैरी रिडग्वे के मामलों का उदाहरण देते हुए बताया कि फाेरेंसिक डीएनए की मदद से 40 वर्ष पुराने अपराध भी सुलझाए गए।

याचिका अर्णव की मां अनु दुग्गल ने दाखिल की थी, जिन्होंने आरोप लगाया कि उनका बेटा आत्महत्या नहीं कर सकता था। अर्णव, आईटीसी ग्रैंड भारत में मैनेजर था और जून 2017 में मेधा तिवारी के घर पर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाया गया। पुलिस ने शुरू से इसे आत्महत्या बताया, जबकि परिवार का कहना था कि कमरे को सुसाइड सीन जैसा दिखाने के लिए तैयार किया गया था।

दिल्ली पुलिस की जांच पर हाई कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि न सिर्फ जांच अधिकारी, बल्कि क्राइम ब्रांच और एसआईटी ने भी एक ही रट लगाकर आत्महत्या का सिद्धांत आगे बढ़ाया और किसी भी वैज्ञानिक, विश्लेषणात्मक या स्वतंत्र विचार से जांच नहीं की।

कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारियों ने अर्णव की महिला मित्र का मोबाइल फोन तुरंत जब्त नहीं किया। वहीं, काॅल रिकाॅर्ड और संदेशों का डिलीट होना गंभीर पहलू था, जिस पर कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट ने अपने फैसले में ये भी कहा कि पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि फोन जब्त न करने का कारण क्या था।

कोर्ट ने कहा कि एकमात्र संभावित गवाह के फोन को बिना सीज किए रहने देना गंभीर चूक है और यह बताता है कि जांच ईमानदारी से नहीं की गई। पोस्टमार्टम के अनुसार मौत का कारण एंटीमार्टम हैंगिंग से हुई एस्फिक्सिया बताया गया, लेकिन हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने यह खोजने की कोशिश ही नहीं की कि आखिर अर्णव आत्महत्या क्यों करता? कोर्ट ने कहा कि रिकार्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे पता चले कि अर्णव अवसाद में था या उसके भीतर आत्मघाती प्रवृत्तियां थीं।

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