पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अखिलेश सिंह ने पीएम मोदी और चुनाव आयोग पर लगाया आरोप। सांकेतिक फोटो
राज्य ब्यूरो, पटना। विधानसभा चुनाव के लिए मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के उपरांत अंतिम मतदाता सूची निर्वाचन आयोग ने घोषित कर दी।
30 सितंबर को सूची जारी होने के उपरांत SIR के उपरांत अंतिम मतदाता सूची को लेकर विपक्ष ने प्रश्न खड़े किए हैं। विपक्षी राजनीतिक दलों का कहना है वह अभी मतदाता सूची का बूथ एवं पंचायत स्तर पर अध्ययन करा रहे हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य अखिलेश सिंह ने अंतिम मतदाता सूची को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं सत्ता पक्ष के विरुद्ध प्रश्न खड़े किए हैं।
सांसद का आरोप है कि चुनाव आयोग एवं बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अंतिम सूची के प्रकाशन में यह नहीं बताया कि मतदाता सूची से कितने विदेशी नागरिकों (घुसपैठियों) को हटाया गया, जबकि देश के प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग ने बार-बार घुसपैठियों के लिए सूची के पुनरीक्षण की बात कही।
बकौल अखिलेश सिंह, 65 लाख नामों की प्रारूप कटौती में 22 लाख लोगों को मृत चिह्नित किया गया, 36 लाख को स्थायी रूप से पलायन या अनुपस्थित दिखाया गया। सात लाख अन्यत्र पंजीकृत पाए गए।
अंतिम सूची में हटाए गए 3.66 लाख नामों में दो लाख पलायन के कारण, लगभग 60 हजार मृत्यु के कारण एवं 80 हजार डुप्लीकेशन (दो स्थानों पर नाम होने) के कारण हटाए गए। इस प्रकार, विदेशी नागरिक एक भी नहीं है।
राजद के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन का कहना है कि किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती तो शीघ्र ही उचित फोरम पर मतदाताओं की हकमारी का विरोध करेंगे। सभी जिलाध्यक्षों को अंतिम मतदाता सूची की प्रति उपलब्ध करा दी गई है।
बीएलए एवं बूथ तथा पंचायत ईकाईयों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर पड़ताल कराने के बाद ही राजद द्वारा कोई अधिकारिक प्रतिक्रिया दी जा सकती है।
यदि अंतिम सूची में भी कोई नाम छूट गया होगा तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चुनाव आयोग द्वारा नाम जुड़वाने और त्रुटि सुधार का विकल्प दिया गया है। इसके बावजूद भी यदि आवश्यकता महसूस किया गया तो उसकी शिकायत सुप्रीम कोर्ट के समक्ष की जाएगी।
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