डीएपी की किल्लत, किसानों को विकल्प नहीं भा रहा (File Photo)
राज्य ब्यूरो, पंचकूला। हरियाणा में सरसों तथा रबी की अन्य फसलों की बुवाई का सीजन है। किसानों को खेतों में डालने के लिए डीएपी (डाई अमोनियम फास्फेट) और यूरिया की जरूरत है।
प्रदेश सरकार का दावा है कि डीएपी तथा यूरिया का पूरा स्टाक है, जबकि अधिकतर जिलों में किसानों को डीएपी के पर्याप्त बैग नहीं मिल रहे हैं। पांच की जरूरत है तो दो बैग ही कृषि रक्षा केंद्रों से मिल रहे हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
हालांकि डीएपी के विकल्प के रूप में बाजार में सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) और एनपीके (नाइट्रोजन,फास्फोरस- पाेटेशियम) उर्वरक मौजूद हैं। किसानों को कृषि रक्षा केंद्र से एसएसपी तथा एनपीके लेने की सलाह भी दी जा रही लेकिन किसान खरीदने काे तैयार नहीं होते हैं।
जबकि डीएपी की रेवाड़ी, नारनौल, फतेहाबाद, जींद हिसार तथा प्रदेश के अधिकतर जिलों में भारी कमी है। पहले भेजे गए स्टाक में डिमांड के मुताबिक आधे बैग भी नहीं भेजे गए।
नारनौल में चार लाख बैग की जरूरत थी तो 80 हजार बैग ही अभी तक भेजे गए। इसी तरह रेवाड़ी नूंह और अन्य जिलों में भी तीस से चालीस प्रतिशत बैग ही आए हैं। जिसकी वजह से किसानों को दो बैग ही डीएपी के मिल रहे हैं।
उसके लिए भी सुबह लाइन लगानी पड़ती है। जो किसान जागरूक हैं वह डीएपी के पीछे नहीं दौड़ रहे हैं। वह एसएसपी और एनपीके का प्रयोग कर सरसों की अगेती बुवाई भी कर चुके हैं। |