LHC0088 • 2025-12-12 14:37:26 • views 1099
संतोष श्रीवास्तव, बहराइच। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश पवन कुमार शर्मा द्वितीय ने गुरुवार की शाम बहराइच के महाराजगंज हिंसा के रामगोपाल मिश्र हत्याकांड के दोषियों को सजा देते हुए टिप्पणी की कि निहत्थे नवयुवक की हत्या, उसके शरीर पर गोलियां चलाकर छलनी करना, उसके पैरों को इस तरह जलाना कि उसके नाखून तक बाहर निकल गए, इस कृत्य ने समाज में अशांति व अस्थिरता पैदा कर दी और हत्याकांड के दूसरे दिन बहुत बड़ी हिंसा की वारदात हुई। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
दोषियों के इस कृत्य से मानवता कराह उठी। सामाजिक व्यवस्था चरमरा गई थी और समाज बिखराव के कगार पर पहुंच गया था। एक वर्ग के आस्था एवं विश्वास की भी हत्या हुई थी। अदालत ने टिप्पणी करते हुए दोषियों के बारे में कहा कि ऐसे शैतानों के लिए न्याय की समुचित मंशा में दंड दिया जाना चाहिए, जिससे समाज में पनप रहे ऐसे हैवानों के अंदर भय उत्पन्न हो और सामाजिक न्याय व्यवस्था के लिए विश्वास पैदा हो।
अदालत ने ‘दंड शास्ति प्रजा: सर्वा दंड एवाभिरक्षित। दंड सुप्तेषु जागर्ति, दंड धर्म विदुर्वधा।’ मनु स्मृति का श्लोक को न्यायाधीश ने अपने आदेश वर्णित करते हुए कहा है कि प्रजा द्वारा राजधर्म का पालन किया जाए। इस दृष्टि से दंड विधान का होना नितांत आवश्यक माना गया था।
दंड के भय से समाज के व्यक्ति अपने धर्म और कर्म से विचलित होने से विरत रहते हैं। दंड ही प्रजाजनों की जानमाल की रखा करता है, इसलिए अपराधी को दंडित करना शासक का परमधर्म माना गया था। अदालत ने स्थापित सिद्धांतों को तोड़ने वालों को उचित दंड से दंडित करना उचित समझा है और दोषियों को कठोर से कठोर दंड दिया है।
फैसला सुनाने के बाद न्यायाधीश ने तोड़ दी पेन की निब
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश पवन कुमार शर्मा द्वितीय ने हत्याकांड के फैसले के बाद दोषी सरफराज उर्फ रिंकू को मृत्युदंड देने के बाद अपने पेन की निब तोड़ दी। इसके बाद खचाखच भरी अदालत में सन्नाटा पसर गया।
142 पन्ने में लिखा गया है अदालत का फैसला
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में सांय साढ़े पांच बजे जब फैसला आया तो 142 पन्ने में दोषियों की कुंडली लिखी हुई थी। 12 गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत तमाम साक्ष्य इसमें शामिल हैं।
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