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उत्तराखंड के मशहूर शिकारी जॉय हुकिल का दावा, संघर्ष के बजाय गुलदार ने चुनी आसान राह

Chikheang 2025-12-12 19:07:38 views 1241
  

मशहूर शिकारी जॉय हुकिल ने गुलदार के आदमखोर होने को लेकर सांझा किए अनुभव। प्रतीकात्‍मक



मनोहर बिष्ट, पौड़ी। उत्तराखंड के मशहूर शिकारी जॉय हुकिल ने कहा कि गुलदार के आहार व व्यवहार में बड़ा बदलाव आया है। गुलदार ने संघर्ष के बजाय आसान राह चुन ली है। शिकार के लिए गुलदार को जंगल में संघर्ष करना पड़ता है। जबकि बस्तियों के समीप गाय, कुत्ता के रुप में उन्हें आसान शिकार मिल रहा है। जिसके चलते गुलदार में संघर्ष के बजाय बस्तियों के समीप रहकर आसान भोजन की तलाश पूरी किए जाने की प्रवृत्ति विकसित होती जा रही है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

जिले में विकास खंड पौड़ी के ग्राम पंचायत चवथ स्थित गजल्ड गांव में बीते चार दिसंबर की सुबह करीब 6:30 बजे भगवती बाला सुंदरी मंदिर से पूजा कर लौट रहे ग्रामीण राजेंद्र नौटियाल को गुलदार ने निवाला बना लिया था। घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में गुलदार की दशहत बनी थी। उत्तराखंड के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक रंजन कुमार मिश्र ने गुलदार को आदमखोर घोषित कर अंतिम विकल्प के रुप में मारने का आदेश जारी किया था।

वन विभाग ने गजल्ड गांव में दो विभागीय शूटर तैनात किए थे। लेकिन क्षेत्रीय जनता लगातार निजी शूटर तैनात किए जाने की मांग कर रही थी। बीते 8 दिसंबर की रात उत्तराखंड के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक रंजन कुमार मिश्र ने गजल्ड में मशहूर शिकारी जॉय हुकिल व राकेश चंद्र बड़थ्वाल को तैनात किए जाने का आदेश जारी किया था। बीती बुधवार रात साढ़े सात बजे वन विभाग व शूटरों की संयुक्त टीम ने गुलदार को मार दिया था।

गजल्ड गांव में आदमखोर के ढ़ेर होने के बाद मशहूर शिकारी जॉय हुकिल ने अपने अनुभव सांझा किए। उन्होंने बताया कि गुलदार जंगल के सबसे चालाक जानवरों में शुमार है। जिस तरह से मानव की प्रवृत्ति व व्यवहार में बदलाव आया है। इंसान के स्वभाव में अधिकत्तर किसी काम किए जाने के लिए आसान राह चुनना है। इंसान की ही तरह अब गुलदार ने अपने भोजन की आपूर्ति के लिए आसान राह चुन ली है। कहा कि जंगल में हिरन या अन्य जानवरों को मारने में गुलदार को अधिक जद्दोजहद करनी पड़ती है।

कई बार गुलदार को अनेक प्रयास के बाद भी सफलता नहीं मिलती है। लेकिन उसकी बहुत सारी ऊर्जा संघर्ष में खत्म हो जाती है। लेकिन अब वह बस्तियों के समीप आकर आसान शिकार की तलाश में रहने लगा है। उसे गाय, कुत्ता शिकार के रुप में आसानी से मिल रहे हैं। गुलदार की सह प्रवृत्ति की चपेट में कई बार इंसान भी उसका शिकार बन जाता है। कहा कि बस्तियों के पास उन्हें आसानी से जीवनयापन के लिए आवश्यक भोजन मिल रहा है। जिससे उनमें अब संघर्ष से शॉर्टकट की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है।
पलायन व खेती सीमित होना भी पड़ा कारण

पौड़ी: मशहूर शिकारी जॉय हुकिल का मानना है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने के पीछे पलायन व खेती के सीमित होना भी बड़े कारणों में एक है। उन्होंने कहा कि पहाड़ के ग्रामीण अंचलों में पलायन बढ़ा है। खेती धीरें-धीरें सिमट रही है। बहुतायत में देखने को मिल रहा है कि घरों के आसपास तक ऊंची-ऊंची झाडि़यां हो गई हैं। कहा कि खेती होने व गांवों में लोगों की अच्छी आबादी से साफ-सफाई होती थी। दूर-दूर तक किसी जानवर का मूवमेंट साफ नजर आता था।
तेजी से बढ़ी है गुलदारों की संख्या

पौड़ी: मशहूर शिकारी जॉय हुकिल का कहना है कि गुलदारों की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। लेकिन जंगल की अपनी सीमा निर्धारित है। कहा कि गुलदारों की संख्या को इस रुप में समझा जा सकता है कि एक कमरे में दो लोगों के रहने की जगह है। लेकिन वहां 10 से 12 लोग रह रहे हैं। इससे संघर्ष बढ़ना स्वाभाविक है।
भोजन के लिए गुलदार के पास नहीं है कोई विकल्प

पौड़ी: मशहूर शिकारी जॉय हुकिल का कहना है कि गुलदार के पास भोजन के लिए कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने गुलदार को मांसाहारी बनाया है। उन्हें अपनी भूख को शांत करने के लिए मांस ही खाना है। या यूं कहें कि इनके पास भोजन के लिए मांस के अलावा अन्य कोई विकल्प ही नहीं है। इस दृष्टि से देखा जाय, तो गुलदार सबसे दयनीय जीवन जी रहा है।
जंगल में उसके भोजन की निर्भरता का घटना है, बस्तियों की ओर बढ़ना

पौड़ी: गुलदार के हिंसक होने के पीछे जंगल में गुलदार को भोजन की निर्भरता कम होना भी हिंसक होने का कारण है। मशहूर शिकारी जॉय हुकिल ने बताया कि जंगलों में हिरन, घुरड़, काकड़ की संख्या में कमी आई है। जो गुलदार का जंगल में मुख्य शिकार माना जाता है। लेकिन गुलदारों की संख्या में बढ़ोत्तरी और उसके भोजन में आई कमी से उसका प्राकृतिक भोजन तंत्र प्रभावित हो रहा है। वह भोजन की तलाश में बस्तियों की ओर बढ़ रहा है। कहा कि गुलदार की इंसान से कोई दुश्मनी नहीं है। वह जानबूझकर हमला नहीं करता है। भूख के चलते कई बार मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आ रही है। यहीं से उसकी नरभक्षी होने की यात्रा शुरु होती है।
घटना पर त्वरित निस्तारण पर हो ठोस कार्य

पौड़ी: मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यून किए जाने के लिए घटना पर त्वरित निस्तारण की दिशा में ठोस कार्य किए जाना होगा। मशहूर शिकारी हुकिल ने कहा कि वन विभाग को जहां से भी गुलदार के बस्तियों के समीप दिखाई देने की सूचना मिलती है, तो उन्हें तत्काल रेस्क्यू कर सुरक्षित क्षेत्र में छोड़ा जाय। पिंजरें में कैद नहीं होता है, तो ट्रैंकुलाइज किया जा। आवश्यक हो, तो उन्हें अंतिम विकल्प के रुप में मार दिया जाय। ऐसा नहीं किया जाता है, तो उसका सीधा मतलब है कि आप मानव-वन्यजीव संघर्ष को बढ़ावा दे रहे हैं। इसको इस रुप में समझे कि इंसान आपराधिक प्रवृत्ति का हो जाय, तो उसे दंडित किया जाता है। यहां तक की फांसी की सजा भी होती है। इसी रुप में जो गुलदार नरभक्षी हो जाय, तो उसे मारना ही अंतिम विकल्प है।
ग्रामीणों ने किया हुकिल का सम्मान

पौड़ी: गजल्ड गांव में ग्रामीणों ने मशहूर शिकारी जॉय हुकिल का सम्मान कर फूलमाला से स्वागत किया। ग्राम प्रधान शंकर नौटियाल ने बताया कि गजल्ड गांव में आतंक का पर्याय बने गुलदार को वन विभाग व शिकारियों की संयुक्त टीम ने ढेर किया है। जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। जिसमें मशहूर शिकारी जॉय हुकिल की भूमिका अहम रही है।
मनोहर
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