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उच्च शिक्षा का एक ही नियामक बनाने को कैबिनेट की स्वीकृति, बीमा संशोधन बिल को भी मंजूरी

cy520520 2025-12-13 12:06:12 views 872
  

उच्च शिक्षा का एक ही नियामक बनाने को कैबिनेट की स्वीकृति (फाइल फोटो)



जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार को उच्च शिक्षा का एक ही नियामक बनाने संबंधी विधेयक को मंजूरी दे दी। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा के एक ही नियामक का प्रस्ताव है। यह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की जगह लेगा।  विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

प्रस्तावित कानून को पहले भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआइ) विधेयक नाम दिया गया था, लेकिन अब उसका नाम विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण विधेयक रखा गया है।यूजीसी गैर-तकनीकी उच्च शिक्षा एवं एआइसीटीई तकनीकी शिक्षा की निगरानी करताहै और एनसीटीई अध्यापक शिक्षा की नियामक संस्था है।

प्रस्तावित आयोग को उच्च शिक्षा के एक ही नियामक के तौर पर बनाने का प्रस्ताव है, लेकिन मेडिकल और ला कालेज इसके दायरे में नहीं आएंगे। इसकी तीन भूमिकाएं प्रस्तावित हैं- नियमन, मान्यता और व्यावसायिक मानकों का निर्धारण।

वित्त सहायता को चौथी भूमिका माना जाता है, लेकिन अभी इसे इस नियामक के तहत लाने का प्रस्ताव नहीं है। वित्तीय सहायता की स्वायत्तता प्रशासनिक मंत्रालय के पास रखने का प्रस्ताव है। एचईसीआइ की अवधारणा पर पूर्व में एक मसौदा विधेयक के रूप में चर्चा हो चुकी है।

भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम के रद्दीकरण) विधेयक, 2018 के मसौदे को 2018 में ही पक्षकारों की प्रतिक्रिया एवं सलाह के लिए सार्वजनिक किया गया था। एचईसीआइ को अमलीजामा पहनाने के लिए धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में नए सिरे से कोशिशें शुरू की गई थी, जिन्होंने जुलाई, 2021 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पद संभाला था।
नरेन्द्र मोदी सरकार बीमा क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव लाने जा रही है

उच्च शिक्षा के एक ही नियामक की जरूरत पर जोर देते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 कहती है, उच्च शिक्षा क्षेत्र में फिर से जान डालने और इसे आगे बढ़ने लायक बनाने के लिए नियामक प्रणाली में पूरी तरह से बदलाव की जरूरत है। नरेन्द्र मोदी सरकार बीमा क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव लाने जा रही है।

केंद्रीय कैबिनेट ने बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) की सीमा को 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने से जुड़े संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। इस संशोधन विधेयक को संसद के जारी शीत सत्र में पेश किया जा सकता है जो 19 दिसंबर तक चलेगा। इस विधेयक में उपभोक्ताओं के हितों का भी ध्यान रखा गया है।

इस वर्ष फरवरी में पेश बजट में बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआइ लाने की घोषणा की गई थी। अब तक बीमा क्षेत्र में 82,000 करोड़ का विदेशी निवेश हो चुका है। इस विधेयक के कानून बनने के बाद बीमा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी जिसका फायदा उपभोक्ताओं को मिल सकता है।

सरकार ने 2047 तक देश के हर नागरिक को बीमा के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा है। विधेयक के मुताबिक बीमा लेने वाले उपभोक्ताओं के हितों के लिए एक उपभोक्ता सुरक्षा फंड का निर्माण किया जाएगा। इसे पॉलिसी होल्डर्स एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड का नाम दिया जाएगा।
अब कोयले का निर्यात करना भी होगा संभव

कैबिनेट ने कोयले के निर्बाध, कुशल और पारदर्शी उपयोग के लिए नए ¨वडो कोलसेतु को मंजूरी दे दी है। कोलसेतु ¨वडो से नीलाम होने वाले कोयले का निर्यात भी किया जा सकेगा और उसे किसी भी औद्योगिक उत्पादन के काम में उपयोग किया जा सकेगा। लेकिन इस विंडो के तहत को¨कग कोल की नीलामी नहीं होगी।

वर्तमान नियम के मुताबिक, कोयला लिंकेज की नीलामी में हिस्सा लेने के लिए पहले यह बताना पड़ता था कि उस कोयले का इस्तेमाल कहां किया जाएगा। बिजली उत्पादन की किसी यूनिट के लिए कोयला लिंकेज लिया गया है तो उस खदान से निकलने वाले कोयले का इस्तेमाल सिर्फ उसी यूनिट में हो सकता था। कोयले के निर्यात पर भी पाबंदी थी।
असैन्य परमाणु क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोलने को स्वीकृति

कैबिनेट ने भारत के रूपांतरण के लिए परमाणु ऊर्जा का सतत दोहन और विकास विधेयक को भी मंजूरी दे दी, जिसका मकसद कड़े नियंत्रण वाले असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलना है।

सरकार का लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। फरवरी में अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए खोलने की योजना की घोषणा की थी।

सीतारमण ने 20,000 करोड़ रुपये के खर्च से छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर या एसएमआर के अनुसंधान एवं विकास के लिए परमाणु ऊर्जा मिशन और 2033 तक देश में विकसित पांच एसएमआर चालू करने की भी घोषणा की थी।
71 अनुपयोगी कानून खत्म होंगे

कैबिनेट ने 71 कानूनों को रद करने के एक विधेयक को भी मंजूरी दे दी, जिनकी कानून की किताबों में जरूरत खत्म हो चुकी है। इन 71 कानूनों में से 65 मुख्य कानूनों में संशोधन हैं और छह मुख्य कानून हैं। एक कानून ब्रिटिश काल का है। अभी तक 1,562 पुराने कानून रद किए जा चुके हैं।
ओमान से मुक्त व्यापार समझौते को स्वीकृति

कैबिनेट ने भारत और ओमान के बीच मुक्त व्यापार समझौते को मंजूरी दे दी, जिस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 17-18 दिसंबर तक ओमान दौरे के दौरान हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। एक बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी 15 दिसंबर से जार्डन, इथियोपिया और ओमान के चार दिवसीय यात्रा पर जाएंगे। कैबिनेट ने 2026 के सीजन के लिए मिलिंग खोपरा (नारियल गरी) का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 445 रुपये बढ़ाकर 12,027 रुपये प्रति ¨क्वटल करने को मंजूरी प्रदान कर दी।
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