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Hanukkah 2025: क्यों 8 दिनों तक मनाया जाता है हनुक्का? क्या आपको पता है इस पर्व का दिलचस्प इतिहास

LHC0088 2025-12-14 21:18:50 views 1125
  

क्यों 8 दिनों तक मनाया जाता है हनुक्का? (Picture Courtesy: Freepik)



लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हनुक्का, जिसे रोशनी का पर्व भी कहा जाता है, यहूदी धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह हर साल यहूदी कैलेंडर के अनुसार किस्लेव महीने की 25 तारीख से शुरू होकर आठ दिनों तक मनाया जाता है।  विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इस त्योहार के पीछे ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व छिपा है, जो यहूदी समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता की लड़ाई को दर्शाता है। आइए जानें इस साल हनुक्का कब से शुरू हो रहा है और क्यों यह आठ दिनों तक मनाया जाता है?  
हनुक्का मनाने की शुरुआत कैसे हुई?

हनुक्का का इतिहास दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व का है, जब जूडिया (वर्तमान इजराइल) पर सेल्यूसिड साम्राज्य का शासन था। राजा एंटियोकस एपिफेन्स ने यहूदियों पर यूनानी संस्कृति और धर्म थोपने की कोशिश की, यहूदी धार्मिक प्रथाओं पर प्रतिबंध लगा दिया और यरूशलेम के दूसरे मंदिर को अपवित्र किया।

इस धार्मिक उत्पीड़न के विरुद्ध यहूदी क्रांति हुई, जिसे मकाबी विद्रोह के नाम से जाना जाता है। यहूदा मकाबी के नेतृत्व में एक छोटे से यहूदी समूह ने सेल्यूसिड सेना के खिलाफ विद्रोह किया और तीन साल की लड़ाई के बाद 165 ईसा पूर्व में यरूशलेम और मंदिर को मुक्त कराया।

इस साल यह त्योहार 14 दिसंबर की शाम से शुरू होगा और 22 दिसंबर की रात तक मनाया जाएगा।

  

(AI Generated Image)
आठ दिनों तक क्यों मनाया जाता है हनुक्का?

मंदिर को शुद्ध करने और फिर से समर्पित करने के बाद, यहूदियों ने मेनोराह जलाना चाहा। लेकिन मंदिर में केवल एक दिन चलने लायक शुद्ध जैतून का तेल बचा था। चमत्कारिक रूप से, वह तेल आठ दिनों तक जलता रहा, जब तक कि नया शुद्ध तेल तैयार नहीं हो गया। इस चमत्कार की याद में हनुक्का आठ दिनों तक मनाया जाता है।

हनुक्का के दौरान, एक खास मेनोरा जिसे हनुक्कियाह कहते हैं, का इस्तेमाल किया जाता है। पहले दिन एक शमा जलाई जाती है, और हर दिन एक नई शमा जोड़कर आठवें दिन सभी आठ शामाएं जलाई जाती हैं। यह प्रकाश का त्योहार है, जो अंधकार पर प्रकाश, निराशा पर आशा और उत्पीड़न पर स्वतंत्रता की विजय का प्रतीक है।

  

(AI Generated Image)
हनुक्का उत्सव की परंपराएं

हनुक्का के दौरान कई विशेष परंपराएं निभाई जाती हैं। लोग तेल में तले हुए फूड्स, जैसे- लटकेस और सूफगनियोट खाते हैं, जो उस चमत्कारी तेल की याद दिलाते हैं। परिवार एक साथ इकट्ठा होते हैं, प्रार्थना करते हैं, एक-दूसरे को गिफ्ट्स देते हैं। इस दिन बच्चों को चॉकलेट के गोल्डन कॉइन भी दिए जाते हैं।  
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