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फ्लेमिंगो से लेकर पेलिकन तक का नया ठिकाना बनी नजफगढ़ झील, एनजीटी में वेटलैंड घोषित करने की मांग तेज

cy520520 2025-12-15 10:37:50 views 1045
  

सांकेतिक तस्वीर।



जागरण संवाददाता, बादशाहपुर (गुरुग्राम)। नजफगढ़ झील का क्षेत्र लगातार बढ़ते जलभराव के कारण एक बार फिर चर्चा में है। झील और इसके आसपास के जलमग्न इलाकों में बड़ी संख्या में विदेशी और प्रवासी पक्षियों की आवाजाही बढ़ी है। फ्लेमिंगो से लेकर पेलिकन तक का नजफगढ़ झील नया ठिकाना बन रही है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

जिसके बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में इस पूरे जलभराव क्षेत्र को वेटलैंड घोषित करने की मांग तेज हो गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि वेटलैंड का दर्जा मिलने से पक्षियों को सुरक्षित हैबिटेट मिलेगा और क्षेत्र के पारिस्थितिक महत्व को संरक्षण मिलेगा।
किसानों की बढ़ी मुश्किलें

नजफगढ़ झील के आसपास करीब 10,000 एकड़ जमीन पर खड़े वर्षा जल ने दर्जनभर गांवों के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी है। नजफगढ़ झील के आसपास काफी संख्या में विदेशी परिंदे दिखने लगे हैं। काफी मात्रा में पानी होने के कारण जल पक्षियों का बेहतर हैबिटेट बन रहा है। अब लोग काफी संख्या में विदेशी पक्षियों को देखने के लिए नजफगढ़ झील के आसपास भी पहुंचने लगे हैं।

पर्यावरण विद वे जल पक्षी विशेषज्ञ राय बताते हैं कि 2025 की एशिया वाटरबर्ड गणना में तीन नई प्रजातियां नजफगढ़ झील के आसपास देखी गई है।

एनजीटी में चल रही सुनवाई के दौरान केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बताया कि नजफगढ़ वेटलैंड के आकलन से जुड़ी रिपोर्ट वेटलैंड्स इंटरनेशनल साउथ एशिया को पुनः निरीक्षण के लिए भेजी गई है।

इसके साथ ही नेशनल सेंटर फार सस्टेनेबल कोस्टल मैनेजमेंट को भी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का कार्य सौंपा गया है। मंत्रालय ने एनजीटी को बताया कि रिपोर्ट के री-वैलिडेशन में दो से तीन महीने का समय लगेगा। एनजीटी ने अगली सुनवाई की तारीख 15 जनवरी तय की है।
हरियाणा वेटलैंड प्राधिकरण की रिपोर्ट और विवाद

हरियाणा वेटलैंड प्राधिकरण द्वारा 29 जुलाई 2024 को दाखिल रिपोर्ट में कहा गया कि नजफगढ़ ड्रेन के किनारे 75 एकड़ क्षेत्र (लगभग 60 मीटर चौड़ाई और 5000 मीटर लंबाई) को वेटलैंड घोषित किया जा सकता है। साथ ही यह भी कहा गया कि जल प्रदूषण नियंत्रण परियोजनाओं के पूरा होने के बाद इसका क्षेत्रफल बढ़ाया जा सकता है।

लेकिन याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने इस रिपोर्ट पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि वास्तविक जलभराव क्षेत्र प्राधिकरण के अनुमान से कहीं अधिक है। उपग्रह चित्रों (2014–2021) के अनुसार नजफगढ़ झील का जलमग्न क्षेत्र 200 से 2048 एकड़ तक दर्ज हुआ है।

ऐतिहासिक राजस्व अभिलेखों (1882) में भी पांच गांवों की 1772 एकड़ जमीन को झील क्षेत्र के रूप में दिखाया गया था। याचिकाकर्ता का दावा है कि 2009 से 2024 के दौरान झील 1500 से 5349 एकड़ तक जलमग्न रही, जिसका औसत क्षेत्रफल लगभग 3800 एकड़ बैठता है। विदेशी पक्षियों के बढ़ते आगमन और तेजी से फैलते वेटलैंड क्षेत्र के बीच अब निगाहें एनजीटी के अगले फैसले पर टिक गई हैं।
नजफगढ़ झील के प्रमुख जल पक्षी

    पक्षी का नाम पहचान
   
   
   बार-हेडेड गूज़
   सिर पर दो काली धारियां, हिमालय पार करके आने वाली सबसे ऊंची उड़ान भरने वाली प्रवासी प्रजातियों में से एक
   
   
   ग्रे हेरान
   लंबी टांगें और भूरे-सफेद रंग का बड़ा बगुला, उथले पानी के किनारे प्रवास
   
   
   नार्दर्न पिंटेल
   लंबी पूंछ, पतली गर्दन, सुंदर रंग
   
   
   गैडवाल
   भूरे-सफेद पैटर्न वाला शांत स्वभाव का बतख
   
   
   कामन कूट
   काले रंग का पक्षी, सफेद चोंच व सफेद माथा
   
   
   पर्पल मूरहेन
   नीला-बैंगनी रंग, लाल चोंच, पानी के किनारे समूहों में
   
   
   ब्लैक-विंग्ड स्टिल्ट
   बहुत लंबी गुलाबी टांगें, काले-सफेद पंख
   


सुल्तानपुर स्थित राष्ट्रीय प्राणी उद्यान विदेशी परिंदों के प्रवास के लिए बेहतर स्थान है। इसके साथ लगते नजफगढ़ झील और पानी वाले इलाके में भी काफी संख्या में

परिंदे प्रवास कर रहे हैं। जल पक्षी को जहां भी जल मिलता है। वहीं प्रवास कर लेता है।
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रामकुमार जांगड़ा, मंडलीय वन्य जीव अधिकारी
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