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दिल्ली में 50% WFH अनिवार्य, उल्लंघन करने वालों की खैर नहीं! NCR के जिलों को लेकर उठ रहा ये सवाल

Chikheang 2025-12-17 21:38:06 views 1247
  

दिल्ली में प्रदूषण से घुट रहा लोगों का दम। एएनआई



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। Delhi Pollution राजधानी दिल्ली में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर रेखा गुप्ता की सरकार ने बुधवार को दो अहम फैसले लिए हैं। इन दोनों फैसलों के तहत गुरुवार से दिल्ली के सभी सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

दिल्ली सरकार में श्रम मंत्री कपिल मिश्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि दिल्ली में गुरुवार से सभी सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम लागू करना अनिवार्य है, उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री कपिल मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया कि जीआरएपी प्रतिबंधों के तहत निर्माण गतिविधियों के रुकने से रोजगार गंवाने वाले पंजीकृत और वेरीफाइड श्रमिकों के बैंक खाते में 10-10 हजार रुपये भेजे जाएंगे। उन्होंने बताया कि यह योजना जीआरएपी तृतीय के कार्यान्वयन के 16 दिनों के दौरान प्रभावित श्रमिकों पर लागू होती है और जीआरएपी चतुर्थ अवधि में भी विस्तारित रहेगी।

मंत्री कपिल मिश्रा ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्क फ्रॉम होम वाला नियम अस्पतालों, अग्निशमन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों सहित आवश्यक सेवाएं वाले कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की विशेषज्ञ समिति ने ग्रेप-4 की पाबंदियों के बीच दिल्ली-एसनीआर में निजी और सरकारी कार्यालयों में 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम का निर्देश जारी किया है। इसी के चलते दिल्ली सरकार ने गुरुवार से सभी निजी और सरकारी कार्यालयों में 50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य किया है, साथ ही उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की बात भी की है।
कब आती है वर्क फ्रॉम होम की नौबत

बता दें कि किसी भी शहर में एक्यूआई 400 के पार जाने पर वर्क फ्रॉम होम की नौबत आती है। वहीं, दिल्ली सरकार द्वारा 50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम करने के बाद सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर दिल्ली में नियम लागू किया गया तो फिर एनसीआर के जिलों में अनिवार्य क्यों नहीं? बताया गया कि हवा के चलते प्रदूषण का स्तर थोड़ा कम हुआ है, जिस वजह से एनसीआर के कई जिलों में एक्यूआई 400 के नीचे दर्ज किया गया। माना जा रहा है कि अगर यहां पर भी AQI 400 के ऊपर जाता है, तो 50 फीसदी वर्क फ्रॉम लागू किया जा सकता है।
प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए करना होगा ये काम

नोएडा में लगातार खराब होते वायु गुणवत्ता को देख नोएडा प्राधिकरण ने प्रदूषण नियंत्रण को एक व्यापक कार्ययोजना लागू की है। इसका केंद्र बिंदु इलेक्ट्रिक व हाइब्रिड मोबिलिटी को बढ़ावा देना, ईवी इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करना है। खासकर आईटी व शैक्षणिक क्षेत्रों में रोजाना होने वाले वाहनों की आवाजाही को कम करना है।

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प्राधिकरण का दावा है कि ‘पहले अपने घर को दुरुस्त’ करेगा और अपने पूरे वाहन बेड़े को स्वच्छ विकल्पों में बदलकर अन्य संस्थाओं के लिए मिसाल पेश करेगा। यह बातें मंगलवार को नोएडा प्राधिकरण सीईओ डॉ. लोकेश एम ने कही। उन्होंने कहा कि योजना के तहत नोएडा प्राधिकरण के सभी कार्यालय के वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदला जाएगा। सीएनजी व बीएस सिक्स मानक वाले वाहनों में बदला जाएगा। दिनभर सड़कों पर चलने वाले वाहनों से होने वाले टेलपाइप उत्सर्जन में कमी आएगी व स्थानीय स्तर पर वायु गुणवत्ता में सुधार होगा।

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बताया कि सुबह आइटी कंपनी, एनएमसी, निजी विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की है। इसमें स्पष्ट किया कि निजी वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए आइटी कंपनियों व विश्वविद्यालयों को ग्रैप-3 व ग्रैप-4 प्रतिबंध हटने तक वर्क फ्राम होम लागू करने की सलाह दी है। इसका उद्देश्य पीक आवर्स में आइटी पार्कों व शैक्षणिक संस्थानों की ओर जाने वाले वाहनों की संख्या कम करना है। शैक्षणिक संस्थानों को हाइब्रिड या पूरी तरह ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने के निर्देश दिए हैं।

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स्कूलों व विश्वविद्यालय परिसरों में बड़े आयोजनों को एक से दो माह स्थगित किया है। छात्रों से निजी दोपहिया वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन अपनाने की अपील की है। प्रदूषण स्तर सामान्य होने तक खुले फूड पार्क व चिमनियों के संचालन पर रोक है। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश, वंदना त्रिपाठी, ओएसडी महेंद्र प्रसाद, महाप्रबंधक सिविल एके अरोड़ा, परियोजना अभियंता आरके शर्मा समेत अन्य उपस्थित रहे।
81 नए और बनेंगे ईवी चार्जिंग स्टेशन

डॉ. लोकेश एम ने कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर प्राधिकरण ईवी चार्जिंग स्टेशन और बैट्री स्वैपिंग नेटवर्क को तेजी से विकसित कर रहा है। पहले चरण में तीन महीने में 81 नए ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इससे पहले ईएसएसएल के माध्यम से लगाए गए 69 चार्जिंग स्टेशनों की समीक्षा में कवरेज और प्रदर्शन को अपर्याप्त पाया गया था। नए सर्वे में शहर भर में 150 संभावित स्थान चिह्नित किए गए हैं और जल्द ही ईओआई जारी किया जाएगा।
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