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Ghatshila By-Election 2025: घाटशिला में आचार संहिता लागू, BJP-JMM में उम्मीदवारों को लेकर संस्पेंस जारी

cy520520 2025-10-7 13:06:19 views 1251
  घाटशिला उपचुनाव में 300 बूथों पर 255823 मतदाता करेंगे मताधिकार का प्रयोग। सांकेतिक फोटो





संवाद सहयोगी, घाटशिला। अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित घाटशिला विधानसभा क्षेत्र के लिए उपचुनाव की घोषणा कर दी गई है।

विधायक रामदास सोरेन के निधन के कारण यह सीट खाली हो गई थी। चुनाव आयोग के अनुसार, 11 नवंबर को होने वाले इस उप चुनाव में 300 बूथों पर 255823 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

निर्वाचन पदाधिकारी सुनील चंद्र ने सोमवार को मीडिया को बताया कि 13 अक्टूबर से नामांकन पत्रों की बिक्री व जमा प्रक्रिया प्रारंभ होगी।



21 अक्टूबर तक नामांकन पत्र भरे जाएंगे। 22 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी होगी। 24 अक्टूबर तक नाम वापसी की तिथि निर्धारित है। 14 नवंबर को वोट की गिनती होगी।

इस उपचुनाव के लिए अनुमंडल पदाधिकारी सुनील चंद्र निर्वाचन पदाधिकारी बनाए गए हैं। वहीं, सीओ धालभूमगढ़ मनोहर लिंडा, बीडीओ घाटशिला यूनिका शर्मा और सीओ घाटशिला निशांत अंबर सहायक निर्वाचन पदाधिकारी बनाए गए हैं।

निर्वाचन पदाधिकारी सुनील चंद्र ने बताया कि घाटशिला विधानसभा में पुरुष मतदाताओं की संख्या 124899 और महिला मतदाताओं की संख्या 130921 है। थर्ड जेंडर मतदाता की संख्या मात्र तीन है।



वहीं, प्रवासी मतदाता की संख्या एक है। दिव्यांग मतदाताओं की संख्या 2735 और सर्विस मतदाताओं की संख्या 368 है। चुनाव की घोषणा के साथ ही विधानसभा क्षेत्र में चुनाव आदर्श आचार संहिता लागू कर दिया गया है।

आयोग ने चुनाव घोषणा के 24 घंटे के अंदर सभी सरकारी भवनों से पोस्टर हटा लेने को कहा है। वहीं, 48 घंटे के भीतर सार्वजनिक क्षेत्रों में बैनर व पोस्टर हटा लेने का निर्देश दिया है।



72 घंटे के अंदर तमाम जगहों से बैनर-पोस्टर हटाना है। उसके बाद यदि कहीं बैनर, पोस्टर व झंडा नहीं हटाया गया तो चुनाव आदर्श आचार संहिता के तहत कार्रवाई की जाएगी।

निर्वाचन पदाधिकारी सुनील चंद्र ने सभी राजनीतिक दलों को निर्धारित समय से पहले अपने बैनर-पोस्टर को हटाकर चुनाव आदर्श आचार संहिता का पूर्ण रूप से पालन करने को कहा है।
कैसा रहा है घाटशिला में चुनावी समीकरण

झारखंड राज्य गठन के बाद वर्ष 2005 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान इस सीट पर कांग्रेस के प्रदीप कुमार बलमुचू की जीत हुई थी। तब बतौर निर्दलीय रामदास सोरेन दूसरे नंबर पर रहे थे। भाजपा के रामदास हांसदा तीसरे नंबर पर थे। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें



वर्ष 2009 के चुनाव में झामुमो की टिकट पर रामदास सोरेन की जीत हुई। उन्होंने कांग्रेस के प्रदीप कुमार बलमुचू को महज 1,192 वोट के अंतर से हराया था।

इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे सूर्य सिंह बेसरा तीसरे स्थान पर थे। इन्हें 28561 वोट मिले थे। आजसू से कान्हू सामंत चौथे स्थान पर थे। इन्हें 10978 वोट मिले थे। मैदान में कुल 14 प्रत्याशी थे।
इस क्षेत्र में सिर्फ एक बार जीती है भाजपा

वर्ष 2014 के चुनाव में समीकरण बदल गया। भाजपा के लक्ष्मण टुडू ने झामुमो के रामदास सोरेन को 6,403 वोट के अंतर से हरा दिया। इस चुनाव में कांग्रेस की सिंड्रेला बलमुचू तीसरे स्थान पर रहीं।



वर्ष 2019 के चुनाव में झामुमो के रामदास सोरेन ने वापसी करते हुए भाजपा प्रत्याशी लखन चंद्र मार्डी को हरा दिया। गठबंधन की वजह से कांग्रेस का पत्ता कटने पर प्रदीप बलमुचू ने आजसू की टिकट पर दांव खेला लेकिन तीसरे स्थान पर रहे।

वर्ष 2024 में मुकाबला एनडीए और आईएनडीआईए के बीच था। झामुमो के रामदास सोरेन के सामने पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन भाजपा प्रत्याशी बनकर आए थे लेकिन हार गए। रामदास सोरेन ने 22 हजार से ज्यादा वोट के अंतर से बाबूलाल सोरेन को हरा दिया।


इस उपचुनाव में एसटी पैठ की होनी है परीक्षा

घाटशिला उपचुनाव झामुमो और भाजपा के लिए बेहद खास है। इसके नतीजे यह संदेश देने के लिए काफी होंगे कि एसटी के बीच झामुमो की पकड़ बरकरार है या भाजपा की स्वीकार्यता बढ़ी है।

वर्ष 2000 के चुनाव में जिस भाजपा के पास एसटी के लिए रिजर्व 28 सीटों में से 14 सीटें थीं, वह अब एक सीट पर सिमट गई है।

झामुमो से चंपाई सोरेन नहीं आए होते तो भाजपा का आंकड़ा शून्य हो जाता। वर्ष 2024 के चुनाव में झामुमो ने 20 और कांग्रेस ने सात एसटी सीटें जीतकर भाजपा को हाशिए पर ला दिया है।



लिहाजा, घाटशिला उपचुनाव से झामुमो अपनी प्रतिष्ठा बरकरार रखना चाहेगी तो भाजपा 2014 के रिजल्ट को दोहराकर सरकार पर मनोवैज्ञानिक दबाव डालना चाहेगी।
BJP-JMM उम्मीदवार को लेकर सस्पेंस जारी

घाटशिला विधानसभा उपचुनाव के लिए राजनीतिक दल कमर कस कर तैयार हैं। लेकिन अभी तक भाजपा और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवारों के नाम को लेकर सस्पेंस बना हुआ है।



मंत्री रामदास सोरेन के निधन के बाद उपचुनाव हो रहा है। इस सीट पर झामुमो अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा थी कि झामुमो दिवंगत मंत्री के परिवार के किसी सदस्य को मंत्री बनाकर चुनाव लड़वा सकता है, लेकिन फिलहाल इस चर्चा पर विराम लगा हुआ है।

दूसरी ओर भाजपा में भी उम्मीदवार चयन को लेकर असमंजस जारी है। रविवार को प्रदेश चुनाव समिति की बैठक हुई थी, जिसमें प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा की गई थी। केंद्रीय चुनाव समिति भाजपा उम्मीदवार का ऐलान करेगी।
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