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Jharkhand News: सारंडा जंगल में आइईडी विस्फोट से संकट में गजराज, ग्रामीणों पर भी संकट

deltin33 2025-10-7 16:36:31 views 1257
  सारंडा जंगल में आइईडी विस्फोट से संकट में गजराज





सुधीर पांडेय, चाईबासा। वन्य जीव अभयारण्य बनने की दिशा में बढ़ रहा सारंडा जंगल हाथियों व अन्य वन्यजीवों का सुरक्षित आशियाना माना जाता है, परंतु जंगल में माओवादियों द्वारा लगाए गए आइईडी हाथियों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

सोमवार को मनोहरपुर प्रखंड स्थित सारंडा जंगल में नक्सलियों द्वारा लगाए गए आइईडी विस्फोट की चपेट में आने से एक जंगली हाथी गंभीर रूप से घायल हो गया है। विस्फोट इतना तेज था कि उसके दाहिने आगे वाले पैर की उंगलियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और पैर से खून बहने लगा।



घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग और पशु चिकित्सक की टीम मौके पर पहुंची। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और घने जंगल के कारण घायल हाथी तक पहुंचने में टीम को करीब चार घंटे लग गए।

मौके पर मौजूद पशु चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया। केले में दवा मिलाकर हाथी को खिलाया गया, जिसे उसने खा लिया। फिलहाल हाथी की हालत गंभीर बनी हुई है और वन विभाग उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है।



इस वर्ष अब तक तीन से अधिक हाथी आइईडी विस्फोट की चपेट में आ चुके हैं। जुलाई माह में एक छह साल की मादा हाथी की आइईडी ब्लास्ट में घायल होने से मौत हो गई थी।

इसके कुछ दिनों बाद, एक 15 साल का हाथी भी इसी तरह एक और आइईडी विस्फोट में मारा गया। अधिकारियों को डर है कि जंगल में और भी हाथी घायल हो सकते हैं।

सुरक्षा कारणों से बचाव कार्य मुश्किल हो रहा है। ड्रोन और फील्ड पेट्रोलिंग की मदद से हाथियों को ढूंढने की कोशिश की जा रही है। पशु चिकित्सक डॉ. संजय कुमार ने बताया कि हाथी के पैर में गहरा जख्म है, जो किसी बड़े धमाके से हुआ प्रतीत होता है।



डॉक्टर ने बताया कि प्रयास किया जा रहा है कि घायल हाथी को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराई जाए। इधर, सारंडा वन प्रमंडल के डीएफओ अविरूप सिन्हा ने कहा कि वन विभाग की टीमें चार डिवीजनों यथा कोल्हान, पोड़ाहाट, चाईबासा और सारंडा में काम कर रही हैं।

ड्रोन की मदद से हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आइईडी विस्फोट में कोई और हाथी तो घायल नहीं हुआ है। आइईडी विस्फोट में हाथी के अलावा और कितने वन्यजीव घायल अथवा मारे गये हैं, यह बताना संभव नहीं है।


आइईडी विस्फोट में अब तक 20 से अधिक ग्रामीण भी गंवा चुके जान

सारंडा के जंगल में लगे आइईडी की चपेट में आकर नवंबर 2022 से अब तक 12 से अधिक सुरक्षाकर्मी बलिदान हो चुके और दो दर्जन से ज्यादा घायल हुए हैं। माओवादियों और उनके गुटों ने जंगल में कई जगह विस्फोटक लगाए हैं।

इनमें कुछ पुराने हैं, जो सालों पहले लगाए गए थे, और कुछ नए हैं, जो 2024 और 2025 में लगाए गए हैं। आइईडी का खतरा सिर्फ सुरक्षाकर्मियों तक ही सीमित नहीं है।



अब तक 20 ग्रामीण भी अपनी जान गंवा चुके हैं। कुछ लकड़ी इकट्ठा करते समय मारे गए, तो कुछ महुआ बीनते समय। सारंडा में हर रास्ता अनिश्चितता से भरा है, चाहे वह सैनिक हो, ग्रामीण हो या हाथी।

यह भी पढ़ें- सारंडा जंगल में नक्सलियों द्वारा लगाए गए IED की चपेट में आने से हाथी घायल, इलाज जारी
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