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दिल्ली में अब इन लोगों का प्राइवेट अस्पताल में होगा मुफ्त इलाज, 15 लाख लाभार्थियों को सीधा होगा फायदा

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निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की वार्षिक आय सीमा 2.20 लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी गई।



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा बढ़ाते हुए दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के निदेशालय सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं (डीजीएचएस) ने ईडब्ल्यूएस (इकनाॉमिकली वीकर सेक्शन) के लिए निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की वार्षिक आय सीमा 2.20 लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी है।

इससे करीब आठ लाख लोग सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। अभी इस वर्ग के करीब सात लाख लोग हर वर्ष उपचार को निजी अस्पताल पहुंचते हैं, अब इनकी संख्या 15 लाख होने का अनुमान है।

डीजीएचएस के आदेश के अनुसार यह फैसला दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है। बताया गया कि संशोधित मानदंड लागू होने के बाद अब अधिक संख्या (15 लाख) में गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवार निजी अस्पतालों में ओपीडी (आउट पेशेंट डिपार्टमेंट) और आइपीडी (इन पेशेंट डिपार्टमेंट) इलाज का लाभ ले सकेंगे।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार पूर्व के वर्षों में दिल्ली के चिन्हित निजी अस्पतालों में करीब 6.5 लाख ईडब्ल्यूएस मरीजों को ओपीडी और लगभग 44 हजार मरीजों को भर्ती इलाज मिला था।
प्रमुख तथ्य

  • विभाग: निदेशालय सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं (डीजीएचएस)
  • योजना: ईडब्ल्यूएस मरीजों के लिए निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज
  • पुरानी आय सीमा: 2.20 लाख रुपये प्रतिवर्ष
  • नई आय सीमा: पांच लाख रुपये प्रतिवर्ष
  • लाभार्थी: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीज


ईडब्ल्यूएस मरीज की आय का निर्धारण निजी अस्पताल नहीं, बल्कि दिल्ली सरकार द्वारा जारी आय प्रमाण-पत्र के आधार पर किया जाता है। अस्पतालों में तैनात नोडल अधिकारी इन दस्तावेजों का सत्यापन कर ईडब्ल्यूएस श्रेणी में इलाज की अनुमति देते हैं।

  • आय प्रमाण-पत्र (इनकम सर्टिफिकेट)- मरीज या उसके परिवार को राजस्व विभाग (रिवेन्यू डिपार्टमेंट), दिल्ली सरकार द्वारा जारी आय प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होता है।
  • ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र (इकनामिकली वीकर सेक्शन सर्टिफिकेट)- पात्र परिवार को सरकार द्वारा जारी ईडब्ल्यूएस (इकनामिकली वीकर सेक्शन) सर्टिफिकेट भी देना होता है।
  • नोडल अधिकारी द्वारा सत्यापन- हर चिंहित निजी अस्पताल में इस सुविधा के लिए नोडल अधिकारी तैनात होता है। वही आय प्रमाण-पत्र, ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र, पहचान पत्र की जांच करता है। जांच के बाद मरीज को ईडब्ल्यूएस श्रेणी में पंजीकृत किया जाता है।
  • डीजीएचएस की निगरानी- पूरी प्रक्रिया की निगरानी, निदेशालय सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं (डीजीएचएस) करता है।


इस सुविधा को लेकर किसी भी तरह की शिकायत की डीजीएचएस जांच करता है। शिकायत सही पाए जाने पर अस्पताल पर कार्रवाई भी हो सकती है।
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