उत्तराखंड सरकार हरिद्वार और आसपास के इलाकों में प्रवेश से जुड़े नियमों पर विचार कर रही है। पुष्कर सिंह धामी ने न्यूज18 से बातचीत में कहा कि हरिद्वार एक पवित्र शहर है और उसकी धार्मिक पहचान को बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। यह चर्चा ऐसे समय हो रही है, जब राज्य कुंभ मेला की तैयारियों में जुटा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक गरिमा बनी रहे, इसके लिए सरकार सभी संभावित विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रही है।
सीएम धामी ने कही ये बात
पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि हरिद्वार एक पवित्र नगर है और उसकी धार्मिक गरिमा बनाए रखना सरकार की ज़िम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि सरकार गैर-हिंदुओं के प्रवेश से जुड़े नियमों पर गंभीरता से विचार कर रही है और इसके लिए पुराने कानूनों व मौजूदा नियमों की गहराई से जांच की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, हरिद्वार नगर निगम के मौजूदा नियमों में पहले से ही कुछ गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश की अनुमति नहीं है। इनमें प्रसिद्ध हर की पौड़ी भी शामिल है। इतिहास में भी ऐसे उदाहरण मिलते हैं। साल 1916 में पंडित मदन मोहन मालवीय ने ब्रिटिश सरकार के साथ एक समझौता किया था, जिसका मकसद गंगा के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखना और हरिद्वार व ऋषिकेश की पवित्रता की रक्षा करना था। बाद में इसी समझौते से जुड़े नियम नगर निगम के कानूनों में शामिल किए गए, जिनमें कुछ प्रमुख घाटों पर प्रतिबंध का प्रावधान भी रखा गया।
105 घाटों पर बैन लगाने की मांग
इस मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, हरिद्वार से ऋषिकेश तक मौजूद सभी 105 गंगा घाटों पर नियमों को और सख्त करने का सुझाव दिया गया है। फिलहाल इस प्रस्ताव पर संत समाज और श्री गंगा सभा के साथ बातचीत चल रही है। श्री गंगा सभा हरिद्वार में धार्मिक गतिविधियों और अनुष्ठानों की देखरेख करने वाली प्रमुख संस्था मानी जाती है। इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरि, निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर, ने इसे ज़रूरी कदम बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि सरकार गंगा नगरी की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए इतने अहम फैसले पर विचार कर रही है।
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सूत्रों के अनुसार, संत समाज लंबे समय से हरिद्वार को “पवित्र शहर” घोषित करने की मांग करता रहा है। इसके साथ ही गैर-हिंदुओं के प्रवेश और रात में ठहरने को लेकर भी नियम बनाने की बात उठती रही है। हर साल हरिद्वार में करीब चार करोड़ श्रद्धालु आते हैं और बड़े स्नान पर्वों के समय यह संख्या और बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय कारोबार और रोज़गार को फायदा होता है। लेकिन बीते कुछ वर्षों में गंगा घाटों पर गैर-हिंदू पर्यटकों की मौजूदगी को लेकर कई बार विवाद खड़े हुए हैं और यह मुद्दा सोशल मीडिया पर भी बहस का कारण बना है। |
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