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न्यूयार्क की जेल में बीती मादुरो की रात, आज हो सकती है कोर्ट में पेशी

Chikheang 7 day(s) ago views 360
  

न्यूयार्क की जेल में बीती मादुरो की रात (फाइल फोटो)



जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली: असाधारण अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन में शनिवार को घर से उठाकर अमेरिका लाए गए वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की रात न्यूयार्क की जेल में बीती। 2020 में उन पर लगाए गए नार्को आतंकवाद साजिश के आरोप में सोमवार को उन्हें मैनहटन स्थित संघीय अदालत में पेश किया जा सकता है।

वेनेजुएला पर अमेरिकी शासन के ट्रंप के दावे के बीच उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को देश का अंतरिम राष्ट्रपति नियुक्त किया गया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सोमवार को इस घटनाक्रम को लेकर बैठक प्रस्तावित है। वहीं संयुक्त राष्ट्र आम सभा प्रमुख ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की तीखी आलोचना करते हुए यूएन चार्टर के पालन को अनिवार्य बताया।

वेनेजुएला के आसपास और कैरिबियन में उड़ानों पर लगा प्रतिबंध रविवार को हटा लिया गया। अमेरिकी परिवहन मंत्री सीन डफी ने इसकी पुष्टि की। बता दें कि मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को दुस्साहसी सैन्य अभियान के बाद शनिवार को काराकास स्थित एक सैन्य अड्डे में बने उनके आवास से कब्जे में लिया गया था।

शनिवार देर शाम उन्हें न्यूयार्क के एक छोटे हवाई अड्डे पर उतारा गया, जहां से हेलीकाप्टर के जरिये मैनहटन ले जाया गया। वहां उन्हें ब्रुकलिन स्थित मेट्रोपोलिटन डिटेंशन सेंटर ले जाया गया। व्हाइट हाउस के सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा वीडियो में डीईए की हिरासत में मादुरो को मुस्कुराते हुए देखा गया। उन्होंने अपने आसपास मौजूद लोगों को गुडनाइट, हैप्पी न्यू ईयर भी बोला।
रोड्रिग्ज ने संभाली देश की कमान

उधर, वेनेजुएला सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को अंतरिम राष्ट्रपति बनाया गया है। उन्होंने राष्ट्रीय टेलीविजन पर अमेरिका से अपील की कि मादुरो को तत्काल रिहा किया जाए। उन्होंने कहा कि देश में केवल एक ही राष्ट्रपति रहेगा, निकोलस मादुरो। हम वेनेजुएला को अमेरिकी उपनिवेश नहीं बनने देंगे।

देश के आंतरिक मंत्री डायसडाडो कैबेलो ने कहा कि ट्रंप की बातों से स्पष्ट हो गया है कि उनकी नजर देश के तेल संसाधनों पर है। ऐसे समय में देश को एकजुट होकर अमेरिका का विरोध करने की जरूरत है।
ट्रंप की नजर विशाल तेल भंडार पर

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि इस कार्रवाई से अमेरिका को वेनेजुएला को चलाने और उसके विशाल तेल भंडार का उपयोग करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी तेल कंपनियां वापसी करेंगी और बुरी हालत में पहुंच चुके तेल ढांचे की मरम्मत करेंगी। इसमें कई साल लग सकते हैं।

उन्होंने कहा कि वेनेजुएला में कम्युनिस्ट शासन से अमेरिकी कंपनियों को काफी नुकसान पहुंचा है। ट्रंप के पहले कार्यकाल में ही थी तख्तापलट की योजना सीएनएन से बातचीत में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जान बोल्टन ने दावा किया कि ट्रंप के पहले कार्यकाल में ही वेनेजुएला पर कार्रवाई की योजना तैयार की गई थी। इसकी प्रस्तुति भी ट्रंप को दी गई थी, लेकिन तब वह इस पर फोकस नहीं कर पाए।

सुरक्षा परिषद की आपात बैठक आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई की वैधता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कोलंबिया के प्रस्ताव पर सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर आपात बैठक प्रस्तावित है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे खतरनाक मिसाल बताया है।

वहीं, पोप लियो ने कहा कि वेनेजुएला की स्वतंत्रता कायम रहनी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र आमसभा प्रमुख अन्नालेना बेयरबोक ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की निंदा करते हुए सख्त लहजे में कहा कि यूएन चार्टर का पालन अनिवार्य है, इसे वैकल्पिक न समझा जाए।

एक्स पर एक पोस्ट में बेयरबोक ने कहा कि यूएन चार्टर को शांति और संकट के समय अंतरराष्ट्रीय व्यवहार के लिए मार्गदर्शक ढांचा बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि यूएन चार्टर के अनुच्छेद दो में साफ तौर पर कहा गया है कि सभी सदस्य देशों को किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल के इस्तेमाल या धमकी से बचना चाहिए, या ऐसे किसी भी तरीके से काम नहीं करना चाहिए जो यूएन के उद्देश्यों के खिलाफ हो।
कराकास में तनावपूर्ण शांति, जश्न मनाने में भी डर रहे लोग

उधर, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से मचे हड़कंप के बाद रविवार को वेनेजुएला में तनावपूर्ण शांति बनी रही। राजधानी काराकास में असामान्य सन्नाटा पसरा रहा। सड़कों पर गाडि़यां कम दिखीं, जबकि किराना दुकानें, पेट्रोल पंप और अन्य व्यवसाय अधिकांशत: बंद रहे। एक दिन पहले हालात बिल्कुल अलग थे। अनिश्चितता के माहौल में लोग संभावित उथल-पुथल की आशंका से दुकानों और पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों में दिखे।

आम तौर पर गाडि़यों और साइकिल चालकों से भरी रहने वाली सड़कें खाली रहीं। राष्ट्रपति भवन के आसपास सशस्त्र नागरिकों और सैन्य बलों की कड़ी तैनाती देखी गई। राजधानी से बाहर ला गुइरा में हमले में क्षतिग्रस्त घरों के निवासी मलबा साफ करते नजर आए। कई इमारतों की दीवारें बुरी तरह टूट गईं।

हालांकि विपक्षी दलों में अमेरिकी कार्रवाई को लेकर खुशी का माहौल है। लोगों ने देश में तानाशाही के अंत पर खुशी मनाई। पूर्वी काराकास के एक गरीब इलाके में निर्माण मजदूर डैनियल मेडाला ने बताया कि सुरक्षा कारणों से चर्च में सुबह की प्रार्थना नहीं हुई। उनके अनुसार लोग जश्न मनाने से भी डर रहे हैं, क्योंकि पिछले चुनावों के बाद हुए कड़े दमन की यादें अब भी ताजा हैं।

यह भी पढ़ें- जासूस, ड्रोन और हेलीकॉप्टर; 2 घंटे 22 मिनट में अमेरिका ने मादुरो को कैसे पकड़ा?

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