विदेशी दुल्हनिया को खूब भा रहा चूल्हे का खाना और यहां का पहनावा
अमर सिंह राघव, बुलंदशहर : प्यार जब सच्चा हो तो दूरी, भाषा और देश की सीमाएं भी उसे रोक नहीं पातीं। इसे जिले के विक्रांत मलिक और हंगरी की क्रिस्टी ने सही साबित कर दिया। विक्रांत और क्रिस्टी दिल्ली के दरियागंज स्थित आर्यसमाज मंदिर में शादी के बंधन में बंध गए। विदेशी दुल्हन को ससुराल में लोगों का पहनावा और चूल्हे पर खाना बनाना बहुत रास आ रहा है। वह चूल्हे में खाना बनाना भी सीख रही हैं। ऊंचागांव विकास क्षेत्र के गांव नगलामदारीपुर के उदयचंद के बेटे विक्रांत मलिक स्टेट बैंक आफ इंडिया में रिलेशनशिप अधिकारी के रूप में तैनात थे। विक्रांत मलिक ने बताया कि साल 2024 में एक डेटिंग एप के जरिए हंगरी की क्रिस्टी की मुलाकात हुई थी। धीरे-धीरे बातचीत शुरू हुई। यह रिश्ता भरोसे, समझ और गहरे प्यार में बदल गया। दोनों अलग-अलग देशों में रहते थे, समय का फर्क था, संस्कृति अलग थी, लेकिन भावना एक जैसी थी। क्रिस्टी अपने शहर सेनतेश से 28 दिसंबर को भारत पहुंची। 29 दिसंबर को विक्रांत और क्रिस्टी आर्य समाज मंदिर में शादी के बंधन में बंध गए। एक जनवरी 2026 को विक्रांत पत्नी क्रिस्टी को नगलामदारीपुर अपने घर ले आए। क्रिस्टी को भारत बहुत अच्छा लगा। यहां के घरों के रंग, संस्कृति, कपड़े और लोगों का पहनावा उसे बहुत पसंद आया। भारतीय खाना पसंद आया। क्रिस्टी ने चूल्हे पर खाना बनाना भी सीखा। क्रिस्टी का कहना है कि चूल्हे में खाना बनाना उनके लिए बहुत अलग है क्योंकि उनके यहां ऐसा कभी देखने को नहीं मिला। चूल्हे के खाने का स्वाद बहुत अच्छा है। विक्रांत तीन माह बाद क्रिस्टी के साथ हंगरी जाएंगे। वे बैंक की नौकरी छोड़ चुके हैं और वीजा आदि की तैयारी में व्यस्त हैं। विदेशी दुल्हन देखने के लिए विक्रांत के घर पर लोगों का तांता लगा रहा। विक्रांत ने बताया कि क्रिस्टी हंगरी के कालेज से बैचलर आफ किंडरगार्टेन टीचर डिग्री की पढ़ाई कर रही हैं। क्रिस्टी का यह फाइनल वर्ष है, जबकि विक्रांत स्नातक हैं। |
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