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साइबर सिटी गुरुग्राम का भूजल बन रहा धीमा जहर, अकेले बंधवाड़ी में कैंसर से खत्म हो चुकीं 25 से ज्यादा जिंदगियां

Chikheang 5 day(s) ago views 511
  

गांव धर्मपुर इलाके की खाली जमीन पर भरा गंदा पानी। फोटो- जागरण



आदित्य राज, गुरुग्राम। साइबर सिटी यानी आईटी, टेलीकाम, ऑटोमोबाइल, गारमेंट्स से लेकर मेडिकल सेक्टर का हब। देश ही पूरी दुनिया के लाखों लोग इस शहर में रहते हैं। इसे अब हरियाणा का ही नहीं बल्कि देश की आर्थिक राजधानी भी कहा जाने लगा है। हरियाणा सरकार को 60 प्रतिशत से अधिक राजस्व देता है। इसके बाद भी शासन-प्रशासन पूरी तरह शुद्ध पानी उपलब्ध कराने में विफल है।

कहीं कूड़े के पहाड़ की वजह से भूजल पीने लायक नहीं रहा, किसी इलाके में डाइंग यूनिटों की वजह से भूजल जहरीला होता जा रहा है, कहीं पानी का स्तर इतना नीचे चला गया है कि खारा हो गया। यही नहीं औद्योगिक इकाइयों का गंदा पानी नालों में डाला जा रहा है।  

  

बेगमपुर खटोला के औद्योगिक क्षेत्र में जमा गंदा पानी। जागरण

कादीपुर, बसई, गढ़ी, हरसरू, बजघेड़ा, दौलताबाद, मोहम्मदपुर, खांडसा, कासन, बहरामपुर सहित कई इलाकों में 150 से अधिक जहां अवैध रूप से इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट संचालित हैं, वहीं 200 से अधिक डाइंग यूनिटें चल रही हैं।इससे जिस यमुना के पानी से शहर की प्यास बूझती है वह दिन प्रतिदिन जहरीली होती जा रही है।

नतीजा यह है कि कैंसर जैसी बीमारी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। खासकर पेट, आंत एवं गले के कैंसर की बीमारी बढ़ रही है। कई लोगों को कैंसर का पता तब चलता है जब वह अंतिम स्टेज में पहुंच जाता है।

इसके बाद भी शासन-प्रशासन द्वारा स्थिति पर लगाम लगाने के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। यदि समय रहते नहीं ध्यान दिया गया तो इंदौर से भी भयावह समस्या सामने आ सकती है क्योंकि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पानी पूरी तरह खराब हो जाए तो उसे पूरी तरह ठीक करके पीने योग्य नहीं बनाया जा सकता।

  

साइबर सिटी के विभिन्न इलाकों से इस तरह का गंदा पानी यमुना में पहुंच रहा। जागरण

ट्रीटमेंट प्लांट से कुछ बैक्टिरिया को खत्म किया जा सकता है, 100 प्रतिशत पानी को स्वच्छ नहीं किया जा सकता। आखिर किन-किन कारणों से साइबर सिटी का भूजल दूषित होता जा रहा है, किस तरह व्यवस्था को बेहतर करने के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है सहित कई सवालों को लेकर प्रस्तुत है गुरुग्राम से दैनिक जागरण के मुख्य संवाददाता आदित्य राज की रिपोर्ट :
कैंसर से खत्म हो चुकीं 25 से अधिक जिंदगियां

अरावली की गोद में गांव बंधवाड़ी बसा है। 15 साल पहले शहर का कूड़ा डालने के लिए बंधवाड़ी में जगह का चयन किया गया। कहा गया था कि प्रतिदिन कूड़े का निस्तारण किया जाएगा ताकि इससे न ही गंदगी फैले और न ही नीचे पानी का रिसाव होने से भूजल खराब हो। इसके ऊपर ध्यान नहीं दिया गया।

नतीजा गांव बंधवाड़ी ही नहीं बल्कि आसपास के गांव बालियावास, ग्वालपहाड़ी, दिल्ली इलाके के गांव मांडी, डेरा एवं बास का भूजल स्तर खराब होता जा रहा है। इनमें बंधवाड़ी की आबादी लगभग 10 हजार है। बालियावास में लगभग चार हजार, ग्वालपहाड़ी में लगभग तीन हजार, मांडी में लगभग पांच हजार, डेरा में लगभग सात हजार एवं बास में लगभग छह हजार की आबादी है।

बंधवाड़ी का पानी 100 फीसद खराब हो चुका है। उसके बाद भी लोग पानी पीने को मजबूर हैं क्योंकि पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था नहीं है। वर्षों से लाेग पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था कराने की मांग कर रहे हैं लेकिन प्रशासन ध्यान देने को तैयार नहीं। नतीजा कुछ सालों के दौरान 25 से अधिक लोगों की मौत कैंसर से हो चुकी है। अभी भी 10 से अधिक लोग कैंसर की बीमारी से ग्रस्त हैं। पेट, आंत एवं सांस की परेशानी से अधिकतर लोग ग्रस्त हैं।
अंदर से खोखला कर रहा है जहरीला पानी

कई साल से बंधवाड़ी में कूड़े का पहाड़ बना हुआ है। वर्तमान में भी 10 लाख टन से अधिक कूड़ा जमा है। फायर सिस्टम विकसित न किए जाने की वजह से गर्मी के दिनों मेंं बार-बार आग लगती है। वर्ष 2024 के दौरान 35 से अधिक बार आग लगी थी। गत वर्ष भी कई बार आग लगी। आग पर काबू पाने के लिए पानी डाला जाता है। उसकी वजह से नीचे लीचेट तैयार हो रहा है।

मानसून के दौरान लीचेट तेजी से बढ़ता है। यह धीरे-धीरे जमीन के नीचे पहुंच रहा है। इस वजह से बंधवाड़ी का पानी पूरी तरह खराब हो चुका है। कुछ महीने पहले हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच रिपोर्ट में भी कहा गया कि बंधवाड़ी का पानी पीने लायक नहीं है। पिछले 10 साल से प्रशासन दावा कर रहा है कि अगले कुछ महीनों में कूड़े का पहाड़ खत्म हो जाएगा लेकिन वह दिन कब आएगा पता नहीं।

राजनीतिक पार्टियों को चुनाव के दौरान इसकी खूब याद आती है। चुनाव जाते ही सभी शांत हो जाते हैं। जहरीला पानी इस तरह लोगों को खोखला करता जा रहा है कि अचानक पता चलता है कि अंतिम चरण का कैंसर है। बंधवाड़ी गांव के रहने वाले 37 वर्षीय सतपाल पूरी तरह स्वस्थ दिखते थे। अचानक एक दिन उनकी तबीयत खराब हुई। जांच कराने पर पता चला कि लिवर कैंसर है।

लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी कुछ ही महीनों के भीतर वे चल बसे। गांव के रहने वाले योगेंद्र प्रधान के पिता महेंद्र सिंह एवं चाचा श्यामबीर सिंह की मौत कुछ ही समय के अंतराल पर कैंसर की वजह से हो गई। दोनों की मौत गले के कैंसर की वजह से हुई। दाेनों को कैंसर है, यह अंतिम स्टेज पर पता चला। हालात यह है कि अब जिसे भी गंभीर होती है वह गांव छोड़कर चला जाता है। इससे गांव के कई इलाके वीरान नजर आते हैँ।
कई इलाकों में अवैध रूप से चल रहे डाइंग यूनिट

गांव बजघेड़ा सहित कई इलाकों में अवैध रूप से डाइंग यूनिट चल रहे हैं। जब शिकायत आती है तो हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सक्रिय होता है अन्यथा कोई ध्यान नहीं। नाम न छापने की शर्त पर एक ग्रामीण ने बताया कि अधिकतर डाइंग यूनिट का संचालन रात में किया जाता है। कुछ दिन में संचालित होते हैं।

एक-डेढ़ साल पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम काफी सक्रिय दिखाई देती थी। समय-समय पर छापेमारी करती रहती थी। इससे यूनिट चलाने वाले डरे हुए रहते थे। अब सभी बेखौफ हैं। यूनिटों का पानी नालों में बहाया जाता है। इससे गांव का भूजल स्तर खराब होता जा रहा है। बता दें कि जून 2022 में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने छापेमारी कर बजघेड़ा इलाके में संचालित 11 डाइंग यूनिट्स को सील किया था।

बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए थे। यहां तक कि जुर्माना भी लगाया गया था। 2024 के दौरान भी बजघेड़ा सहित कई इलाकों में छापेमारी कर अवैध रूप से संचालित डाइंग यूनिट्स सील किए गए थे। शिकायत थी कि डाइंग यूनिटों का पानी नजफगढ़ ड्रेन में पहुंच रहा है। इससे यमुना का पानी तेजी से खराब हो रहा है। नियमानुसार डाइंग यूनि्स के लिए एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) लगाना अनिवार्य है। पैसे बचाने के चक्कर में उद्यमी प्लांट नहीं लगाते हैं।
खनन माफिया ने खत्म कर दिया भूजल

साइबर सिटी व आसपास के इलाके अरावली पहाड़ी की गोद में बसे हैं। अवैध खनन के दौरान खनन माफिया भूजल का इतना दोहन किया गया कि जहां अधिकतर इलाकों में पानी का नामोनिशान नहीं वहीं काफी इलाकों का पानी खारा हो गया। जब एक स्तर से अधिक पानी निकाला जाता है तो भी पानी खारा हो जाता है। नतीजा यह है कि कई साल पहले पूरे गुरुग्राम को डार्क जोन घोषित करना पड़ा। अरावली के सीने पर बनाए गए हजारों फार्म हाउस व अन्य गैर वानिकी गतिविधियों की वजह से भी भूजल का दोहन किया जा रहा है।
औद्योगिक इकाइयों का पानी सीधे यमुना में पहुंच रहा

सेक्टर-37 एवं मानेसर सहित कई औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित काफी औद्योगिक इकाइयों का गंदा पानी सीधे यमुना में पहुंच रहा है। इसका प्रमाण है गाडौली के नजदीक निकलने वाले नाले का पानी पूरी तरह काला होना। अलकतरा की तरह नाले का पानी काला है। यह पानी नजफगढ़ ड्रेन से होते हुए यमुना में पहुंच रहा है।

बता दें कि साइबर सिटी व आसपास के इलाकों में यमुना से आने पानी को ही ठीक कर आपूर्ति की जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर सिटी व आसपास का पानी तेजी से दूषित होता जा रहा है। जब पानी पूरी तरह से जहरीला हो जाए फिर उसे कितना भी ठीक कर दें, पीने लायक नहीं रह जाता। उपाय दूसरा नहीं है, इसलिए लोग जहर पीने को मजबूर हैं।

  

  





मैं पिछले 10 सालों से अपने गांव बंधवाड़ी की लड़ाई लड़ रहा हूं। गांव के काफी परिवार कैंसर सहित विभिन्न बीमारियों की वजह से तबाह हो चुके हैं। डीएलएफ से कुछ ही दूरी पर गांव है, इसके बाद भी काफी लोग गांव छोड़ चुके हैं। 25 से अधिक लोगों की मौत केवल कैंसर की वजह से हो चुकी है। 10 से अधिक कैंसर से पीड़ित हैं। काफी लोग बीमारी को बताते भी नहीं ताकि परिवार के बारे में बाहर गलत संदेश न जाए। गांव में बाहर से लोग आने से हिचकते हैं। कैंसर वाले गांव के रूप में पहचान बनती जा रही है। सभी को पता है कि गांव का भूजल पूरी तरह खराब है फिर भी पेयजल लाइन बिछाने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसका लाभ टैंकर माफिया उठा रहे हैं। काफी माफिया पानी बेचकर मालामाल हो चुके हैं। ऐसा लगता है कि जैसे पूरी साजिश के तहत गांव को बर्बाद किया जा रहा है।


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- संजय हरसाना, सामाजिक कार्यकर्ता निवासी बंधवाड़ी


साइबर सिटी के अधिकतर इलाकों में सीवर लाइन व पेयजल लाइन के बीच गैप है। सड़क के एक तरफ यदि सीवर लाइन है तो दूसरी तरफ पेयजल लाइन है। इससे सीवर का पानी पेयजल के पानी में मिलने का चांस बहुत कम रहता है। वर्षा के दिनों में जलभराव के दौरान दोनों पानी के मिलने की आशंका रहती है। कई बार मिल भी जाता है। इसके लिए जलभराव की समस्या से निजात पाना होगा। जहां तक यमुना के पानी का दूषित होने का सवाल है तो इसके ऊपर नियंत्रण पाना होगा। औद्योगिक इकाइयों का गंदा पानी यमुना में जा रहा है। उसी पानी को वापस लाकर ठीक किया जाता है। ट्रीटमेंट प्लांट में कुछ बैक्टिरिया को खत्म कर सकते हैं, पानी को पूरी तरह शुद्ध नहीं कर सकते। जब तक बर्दाश्त करने की क्षमता शरीर में रहती है, तब तक बीमारी नहीं होती। जैसे ही किसी कारणवश क्षमता कम होती है, बीमारी हावी हो जाती है।


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- डॉ. वीके गुप्ता, सेवानिवृत मुख्य अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग


भूजल का खराब होना गंभीर चिंता का विषय है। खराब पानी की वजह से पेट, आंत एवं गले के कैंसर की बीमारी हो रही है। साइबर सिटी व आसपास के काफी लोगों को पेट से संबंधित परेशानी है। यह पानी की खराब की वजह से है। पानी में लेड, आर्सेनिक एवं मरकरी की मात्रा बढ़ती जा रही है। यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। पानी की खराबी से होने वाली परेशानी अचानक पता चलती है। कई बार अंतिम स्टेज पर बीमारी रहती है तब पता चलता है। इसके ऊपर गंभीरता से काम करना होगा। किसी भी हाल में पेयजल लाइन के पानी में सीवर का पानी न मिले, इसका ध्यान रखना होगा। आवश्यकता है समय-समय पर पानी की जांच कराते रहने की।


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- डॉ. राहुल भार्गव, कैंसर रोग विशेषज्ञ व निदेशक, फोर्टिस अस्पताल
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