ठाकुरजी की सेवा में रखी चांदी की अंगीठी।
संवाद सहयोगी, जागरण, वृंदावन। ठाकुरजी को भी सर्दी से छुटकारा दिलाने को सेवायत विभिन्न प्रकार के प्रयत्न कर रहे हैं। ठाकुर बांकेबिहारीजी, ठाकुर राधादामोदर, ठाकुर राधारमणलाल समेत सभी मंदिरों में ठाकुरजी को ठिठुरनभरी सर्दी से बचाने के लिए उनके समक्ष चांदी की अंगीठी में अग्नि जलाकर रखी जा रही है। ठाकुरजी के भोग में गर्म दूध, पंचमेवा व केसरयुक्त हलवा भी परोसा जा रहा है।
भोग में परोसे जा रहे सूखे मेवा व केसर
सर्दी का प्रभाव बढ़ने के साथ ही मंदिरों में ठाकुरजी को सर्दी के प्रभाव से बचाने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। ठाकुरजी को गर्म पोशाक धारण करवाई ही जा रही है। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर, ठाकुर राधावल्लभ मंदिर, ठाकुर राधारमण, ठाकुर राधादामोदर मंदिर समेत दूसरे मंदिरों में ठाकुरजी के सिंहासन के आगे अब चांदी की अंगीठी में अग्नि जलाकर रखी जा रही है। ठाकुर बांकेबिहारीजी के समक्ष चांदी की अंगीठी में अग्नि जलाकर रखी जा रही है।
चार प्रहर परोसा जा रहा भोग
ठाकुर बांकेबिहारीजी को दिन में चार प्रहर भोग अर्पित किया जा रहा है। भोग में पंचमेवा व केसर की मात्रा में वृद्धि कर दी गई है। सुबह शृंगार आरती के दौरान ठाकुरजी को बालभोग, दोपहर को मंदिर के पट बंद होने से पहले राजभोग, शाम को मंदिर खुलने पर उत्थापन भोग और रात में मंदिर के दर्शन बंद होने से पहले शयनभोग परोसा जा रहा है। भोग में काजू, बादाम, चिलगोजा, पिस्ता भोग में शामिल किए जा रहे हैं।
इत्र की हो रही मालिश
सर्दी के दिनों में ठाकुरजी को गर्माहट देने के लिए सेवायत हिना समेत अनेक प्रकार के इत्रों की मालिश कर रहे हैं। जिससे उन्हें गर्माहट मिलती रहे। दिनभर दर्शन के लिए खड़े रहने के बाद ठाकुरजी को प्रतिदिन दोपहर को और शाम को मालिश की जा रही है।
बिछाई जा रही सनील की रजाई-गद्दा
दिनभर भक्तों को दर्शन देने के बाद जब ठाकुरजी को रात में शयन करवाया जाता है तो उनके पलंग पर सनील की रजाई, गद्दा व तकिया बिछाए जा रहे हैं। ताकि रात में उन्हें गर्माहट मिलती रहे। |