search

Budget 2026: ट्रंप की ट्रेड डील, जॉब्स और सोना-चांदी... बजट में रखना होगा किन-किन चीजों का ध्यान; Experts ने बताई अंदर की बात

Chikheang 2026-1-6 19:57:53 views 934
  

बजट 2026 में इन्फ्रा और मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस जरूरी



राजीव कुमार, नई दिल्ली। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर अनिश्चितता आगामी बजट के लिए चुनौती साबित होता दिख रहा है। 50 प्रतिशत शुल्क पहले से जारी है और बदले हालात में अमेरिकी राष्ट्रपति और शुल्क लगाने की धमकी दे रहे हैं। ऐसे में जानकारों का कहना है कि बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस मुद्दे की अनदेखी नहीं कर सकती हैं।

अमेरिका में भारत का सालाना 90 अरब डालर का वस्तु निर्यात है और इनमें से अधिकतर निर्यात रोजगारपरक सेक्टर का है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आगामी वित्त वर्ष 2026-27 में विकास दर को सात प्रतिशत से ऊपर रखने के लिए बजट में हर हाल में ऐसे प्रविधान करने होंगे, जिससे मैन्यूफैक्चरिंग और रोजगार सृजन की रफ्तार तेज रहे।

अमेरिका में भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत शुल्क से गारमेंट, जेम्स व ज्वेलरी, लेदर जैसे आइटम के निर्यात प्रभावित होते दिख रहे हैं और इतने अधिक शुल्क पर एक लंबे समय तक अमेरिका के बाजार में निर्यात को पहले की तरह जारी रखना आसान नहीं होगा। ऐसे में मैन्यूफैक्चरिंग और रोजगार दोनों प्रभावित होंगे, जिससे विकास दर पर असर पड़ेगा।

जानकारों का कहना है कि आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए फरवरी में पेश होने वाले बजट में पूंजीगत खर्च या इन्फ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले सरकारी खर्च का प्रविधान पहले से ज्यादा रहेगा। चालू वित्त वर्ष में इस मद में 11.2 लाख करोड़ से अधिक का प्रविधान रखा गया है।

हालांकि, चालू वित्त वर्ष के लिए आवंटित राशि आगामी मार्च तक खर्च होने की उम्मीद नहीं दिख रही है। रेलवे अपने हिस्से की आवंटित राशि का 80 प्रतिशत गत दिसंबर अंत तक खर्च कर चुका है,लेकिन अन्य महकमे की खर्च गति कम है।
पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी की गति को जारी रखना होगा

एचडीएफसी बैंक की प्रमुख अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता का मानना है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की अनिश्चितता को देखते हुए आगामी बजट में सरकार को पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी की गति को जारी रखना होगा और मैन्यूफैक्चरिंग बढ़ाने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव जैसी अन्य स्कीम लाने की जरूरत होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक अमेरिका में हमारे निर्यात का बुरा हाल नहीं है, लेकिन जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर जैसे सेक्टर जिनके निर्यात प्रभावित होने की आशंका है, उन सेक्टर के निर्यातक अमेरिका की जगह अन्य देशों में अपने निर्यात की संभावना तलाश सकते हैं।
निर्यात के लिए नए बाजार तलाशना नहीं होगा आसान

फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशंस (फियो) के पूर्व चेयरमैन शरद कुमार सराफ कहते हैं कि निर्यातकों को अब अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की कोई उम्मीद नहीं है और वे उस हिसाब से ही तैयारी कर रहे हैं। अन्य निर्यातक भी इसी तरह का कदम उठा सकते हैं। वहीं कुछ अन्य निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है और सैकड़ों ऐसे निर्यातक हैं जो सिर्फ अमेरिका में ही निर्यात करते हैं। उन्हें नए बाजार तलाशने और वहां पैर जमाने में समय लगेगा और तब तक उनका कारोबार प्रभावित हो सकता है।
like (0)
ChikheangForum Veteran

Post a reply

loginto write comments
Chikheang

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
167348