सबरीमला से सोना चोरी कोई साधारण वारदात नहीं, पूरी साजिश थी एसआइटी (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सबरीमला मंदिर से सोना चोरी किए जाने के मामले में विशेष जांच दल (एसआइटी) ने केरल हाइकोर्ट को सौंपी रिपोर्ट में बताया है कि यह कोई साधारण चोरी नहीं, बल्कि पूरी योजना के साथ रची गई बड़ी साजिश थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य आरोपित उन्नीकृष्णन पोट्टी, पंकज भंडारी और बेल्लारी के सोना व्यापारी गोवर्धन इस साजिश के अहम किरदार थे। एसआइटी का कहना है कि आरोपितों ने जांच एजेंसियों से बचने के लिए हर कदम पहले से तय किया था।
जांच में सामने आया कि अक्टूबर 2025 में बेंगलुरु में एक गुप्त बैठक हुई थी, जिसमें चोरी की योजना के साथ-साथ पकड़े जाने की स्थिति में क्या करना है, इस पर भी चर्चा हुई थी।बेहद चालाकी से निकाला गया सोनामंदिर के गर्भगृह से सोना बेहद चालाकी से निकाला गया।
इसमें द्वारपाल की मूर्तियों और सात हिस्सों वाले लकड़ी के पटल से सोना हटाया गया। जांच के दौरान एक विशेषज्ञ की मदद से पटल से 409 ग्राम सोना बरामद किया गया, जिसे बाद में व्यापारी गोवर्धन तक पहुंचाया गया था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मंदिर की चढ़ावे की रकम को संदिग्ध बैंक खातों के जरिए इधर-उधर किया गया, ताकि चोरी पर पर्दा डाला जा सके।
अंतरिम रिपोर्ट 19 जनवरी को पेश की जाएगी
एसआइटी ने कोर्ट को बताया कि यह मामला पूर्व नियोजित और संगठित डकैती का है और बरामद सोने की विज्ञानी जांच जरूरी है, ताकि यह पता चल सके कि कुल कितना सोना चोरी हुआ। जांच पूरी होने तक आरोपितों को जमानत न देने की मांग करते हुए एसआइटी ने कहा कि इससे साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ का खतरा है।
इससे पहले देवस्वोम पीठ ने एसआइटी के अनुरोध पर जांच की समय-सीमा बढ़ाते हुए छह सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया था। अगली अंतरिम रिपोर्ट 19 जनवरी को पेश की जाएगी। इस मामले में कुल 15 लोगों पर द्वारपाल मूर्तियों से और 12 लोगों पर लकड़ी के पटल से सोना निकालने का आरोप है। अब तक 10 आरोपित गिरफ्तार होकर न्यायिक हिरासत में हैं। एसआइटी की यह रिपोर्ट आगे की न्यायिक कार्रवाई की दिशा तय करने में अहम मानी जा रही है।
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