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वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई पर गरमा रही अंतरराष्ट्रीय सियासत, भारत में क्यूबा के राजदूत ने ट्रंप पर साधा निशाना

Chikheang 5 day(s) ago views 129
  

जुआन कार्लोस मार्सन अगुइलेरा ने वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य अभियान की कड़ी निंदा की



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में क्यूबा के राजदूत जुआन कार्लोस मार्सन अगुइलेरा ने वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य अभियान की कड़ी निंदा की। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी को \“\“आपराधिक कृत्य\“\“ और \“\“आतंकवादी कृत्य\“\“ करार देते हुए उन्होंने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।

एक विशेष साक्षात्कार में अगुइलेरा ने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी अकेला देश अमेरिका को इस तरह की एकतरफा कार्रवाइयों से नहीं रोक सकता है। उन्होंने वाशिंगटन की अंतरराष्ट्रीय नीति में इस \“\“पागलपन\“\“ का मुकाबला करने के लिए दुनिया से एकजुट होने का आह्वान किया। राजदूत ने कहा, \“\“मेरी राय में वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की यह सैन्य आक्रामकता एक आपराधिक कृत्य है। यह एक आतंकवादी कृत्य है क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून में निहित सभी सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। यह एक संप्रभु देश के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई है।\“\“

उन्होंने अमेरिकी नीतियों, जिनमें टैरिफ वार, ईरान को धमकियां और सैन्य हमले शामिल हैं, पर प्रकाश डालते हुए वैश्विक एकता की आवश्यकता पर बल दिया। अगुइलेरा ने कहा, \“मुझे लगता है कि कोई भी अकेला देश अमेरिका को रोक नहीं सकता और न ही रोक पाएगा। हमें एकजुट होना होगा। यह एकजुट होने का समय है..हमारे पास संयुक्त राष्ट्र है। हम इस बात से इन्कार नहीं कर सकते कि संयुक्त राष्ट्र अपनी भूमिका निभाता है..अब हमारे पास ब्रिक्स संगठन भी है। हम यह कदापि स्वीकार नहीं कर सकते कि ये सभी (बहुपक्षीय संगठन) अमेरिकी सरकार द्वारा थोपी गई भूमिका के आगे झुक जाएं। अब सभी आवाजों को एकजुट करने का समय है। यही एकमात्र तरीका है जिससे हम अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय नीति को निर्देशित करने वाले इस पागलपन को रोक सकते हैं।\“
बाहरी दबाव से परे है चाबहार बंदरगाह : ईरान के राजदूत

भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथली ने इस बात पर जोर दिया है कि चाबहार बंदरगाह परियोजना क्षेत्रीय संपर्क और सतत विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई एक रणनीतिक, दीर्घकालिक पहल है। उन्होंने कहा कि इसे अस्थायी कारकों या बाहरी दबावों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। भारत-ईरान संबंध लंबे समय से चली आ रही मित्रता और साझा हितों पर आधारित हैं और इनमें गहराई और मजबूती बनी हुई है। कुछ बाहरी बाधाओं के बावजूद, द्विपक्षीय संबंधों में निरंतरता और गतिशीलता बनी हुई है।

(न्यूज एजेंसी एएनआई और पीटीआई के इनपुट के साथ)
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