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दिल्ली व लखनऊ में महक रहा है अमेठी के ढुडेहरी का गुलाब, किसान हो रहे मालामाल

LHC0088 3 day(s) ago views 79
  

खेत में गुलाब का फूल दिखाते किसान राज बहादुर मौर्य : जागरण



अमित पांडेय, जागरण, अमेठी : कमरौली में जगदीशपुर के ढुडेहरी गांव के दर्जनों किसानों ने गुलाब की खेती कर परिवार की माली हालत बदल दी है। इनके खेतों के गुलाब देश की राजधानी दिल्ली, प्रदेश की राजधानी लखनऊ, वाराणसी, रायबरेली, सुलतानपुर, अयोध्या व जौनपुर सहित कई शहरों में सुगंध फैला रहे हैं।

बड़ा मुनाफा देख यहां के किसानों ने परंपरागत खेती को छोड़कर फूल की खेती को अपनाया और अब स्वावलंबी बन चुके हैं। यहां के गुलाब के फूलों को कई शहरों में आर्डर के अनुसार वह पार्सल बनाकर बस या निजी वाहनों से भेजा जाता है।
रामराज से सीख लेकर कर रहे गुलाब की खेती

रामराज मौर्या ने बताया कि करीब 30 वर्ष से गुलाब की खेती कर रहे हैं। परंपरागत खेती से फूल की खेती में ज्यादा मुनाफा है। वह बाजार का काम देखते है और उनके बेटे राजबहादुर मौर्या कीटनाशक और सिंचाई व गोडाई का कार्य देखते हैं। उन्होंने बताया कि एक बीघे में गुलाब की फसल से करीब दो से ढाई लाख रुपये वर्ष का बच जाता है। उन्होंने बताया कि उनसे प्रेरणा लेकर एक दर्जन से अधिक उनके और कई अन्य गांवों के लोग भी सीख लेकर गुलाब की खेती कर रहे हैं।
एग्रीमेंट पर खेत लेकर लाभ

राम प्रसाद मौर्या, राम राज मौर्या, सुंदर लाल पासी, राम भवन, सुखदीन, जितेंद्र कुमार, रामकरन, गंगा प्रसाद आदि ने बताया कि 25 हजार रुपये बीघा खेत को एग्रीमेंट पर लेकर गुलाब की खेती कर रहे हैं। गुलाब की खेती से अच्छा मुनाफा हो जाता है जिससे परिवार की जीविका चल रही है। एक बीघे गुलाब की फसल लगाने में करीब एक लाख से डेढ़ लाख रुपये लागत लगती है और प्रति माह दस से 15 हजार रुपये सिंचाई, कीटनाशक, उर्वरक में लगता है। सारा खर्च निकाल कर करीब दो लाख रुपये एक बीघा में सालाना बचत हो जाती है।
सीजन में मिलता है अधिक दाम

किसानों की माने तो गुलाब के फूल का दाम शादी, नववर्ष वैलनटाइन-डे पर अधिक दाम मिलता है। एक रुपये से लेकर दस रुपये पीस तक बिकता है। करीब डेढ़ सौ से लेकर तीन सौ रुपये किलो तक बिकता है। गुलाब की खेती परंपरागत खेती से कई गुना मुनाफा गुलाब के फूल की खेती से है। फूल की खेती से यहां के किसानों माली हालत भी मजबूत हुई है।
जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह ने बताया कि आनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने के उपरांत प्रथम आवक प्रथम पावक के आधार पर कृषकों का चयन कर काइंड डीबीटी के माध्यम से कृषकों को लाभांवित किया जाता है। रजिस्ट्रेशन के लिए किसान खतौनी, बैंक पासबुक की फोटोकापी, आधार कार्ड, फोटो और मोबाइल नंबर के साथ कार्यालय में संपर्क कर पंजीकरण करा सकते हैं।
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