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जागरण संवाददाता, लखनऊ। उपभोक्ता मुन्नी देवी का खाता संख्या 4326760000 है। उपभोक्ता परेशान है, क्योंकि दिसंबर 2025 का बिल नहीं आया। उपभोक्ता का कहना है कि नवंबर माह में भी कई चक्कर लगाने के बाद मीटर रीडिंग हुई थी। अब दिसंबर का बिल जनवरी माह में तमाम कहने सुनने के बाद आया, उसमें भी मीटर रीडिंग का कोई जिक्र नहीं है और बिल 8583 आ गया है।
केस दो
उपभोक्ता संजीव अग्रवाल का खाता संख्या 1674600000 है। कई माह से बिल नहीं मिला। बड़ी मुश्किल से गलत बिल उन्हें दिया गया। फिर शिकायत हेल्पलाइन नंबर 1912 पर की तो फिर बिना बिल संशोधित करे ही 5578 रुपये का बिल बना दिया। उपभोक्ता का आरोप है कि मीटर रीडर आता नहीं है। बिल समय पर कभी नहीं मिलता, अब संशोधित भी सही से नहीं हो रहा है। बिजली का खर्च कुछ और और बिल कुछ और बनाया जा रहा है।
यह चंद मामले हैं, जो बताते हैं कि मीटर रीडर उपभोक्ताओं के घर नहीं पहुंच रहे हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को बिजली के बिल समय पर नहीं मिल रहे हैं। अगर सेल्फ रीडिंग को फिर से शुरू नहीं किया गया तो उन उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा परेशानी होगी जो सही हैं और जितनी बिजली खर्च करेंगे, उतने का बिल जमा करते हैं, वहीं माह के प्रथम सप्ताह में।
ऐसे उपभोक्ताओं का तर्क है कि विभाग उन उपभोक्ताओं पर सख्ती करे जो स्टोर रीडिंग करते हैं। सही उपभोक्ताओं के लिए सुविधा तब तक बंद न की जाए जब तक पूरी राजधानी में प्री पेड स्मार्ट मीटर की सुविधा न शुरू कर दी जाए। क्योंकि मीटर रीडर टेबल रीडिंग यानी घर में ही रीडिंग भरकर बिल भेज रहे हैं, जो गलत हो रहे हैं। |
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