सांकेतिक तस्वीर
जागरण संवाददाता, राउरकेला। कुआरमुंडा समूह शिक्षा विभाग में एक अजीब मामला सामने आया है। कार्य में लापरवाही के आरोप में पहले निलंबित किए गए एक शिक्षक को उसी विभाग में सीआरसीसी (क्लस्टर रिसोर्स सेंटर कोऑर्डिनेटर) के रूप में जिम्मेदारी दे दी गई है।
यह निर्णय अब स्थानीय शिक्षकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। मिली जानकारी के अनुसार, कुआरमुंडा समूह शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत शिक्षक को पिछले एक वर्ष के दौरान दो बार निलंबित किया जा चुका है। बताया जाता है कि जब वे प्रधान शिक्षक के रूप में कार्यरत थे, तब विद्यालय की एक महिला शिक्षिका के साथ दुर्व्यवहार के आरोप में उन्हें निलंबित कर दिया गया था।
इसके बाद उन्हें दूसरे विद्यालय में फिर से प्रधान शिक्षक का कार्यभार सौंपा गया, लेकिन वे अक्सर अनुपस्थित रहते थे। विद्यालय में उनकी लगातार गैरहाजिरी की शिकायत पर जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर बीईओ ने आकस्मिक निरीक्षण किया। जांच में शिक्षक अनुपस्थित पाए जाने पर 17 जुलाई 2025 के पत्र संख्या 1642 के तहत उन्हें कार्य में लापरवाही के लिए निलंबित कर दिया गया।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिस अधिकारी ने उन्हें निलंबित किया था, उसी अधिकारी ने एक सप्ताह के भीतर जिला शिक्षा विभाग की स्वीकृति लिए बिना उन्हें बीरमित्रपुर समीपस्थ क्लस्टर में सीआरसीसी के रूप में नियुक्त कर दिया।
शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई ने शिक्षक समुदाय में असंतोष और सवाल दोनों खड़े कर दिए हैं। स्थानीय शिक्षक संघ का कहना है कि संबंधित क्लस्टर में कई वरिष्ठ शिक्षक होने के बावजूद निलंबित शिक्षक को जिम्मेदारी देना नियमों का खुला उल्लंघन है।
वहीं, समूह शिक्षा अधिकारी का कहना है कि क्लस्टर के मौजूदा सीआरसीसी के अस्वस्थ होने और पद छोड़ने के कारण अस्थायी रूप से निलंबित शिक्षक को कार्यभार सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही स्थायी सीआरसीसी की नियुक्ति की जाएगी।
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