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साइबर क्राइम पर लगाम कसने की तैयारी, पटना में तीन अतिरिक्त थाने खोलने का भेजा गया प्रस्ताव

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साइबर अपराध बढ़ते मामलों को लेकर बैठक करते रेंज आईजी जितेंद्र राणा और एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा। फोटो जागरण



जागरण संवाददाता, पटना। साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं को लेकर रेंज आइजी जितेंद्र राणा बुधवार को एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा, सभी एसपी व डीएसपी के साथ बैठक की। साइबर अपराधों से संबंधित कांडों की समीक्षा करते हुए लंबित मामलों के त्वरित एवं गुणात्मक निष्पादन के दिशा-निर्देश दिया।

पटना में एकमात्र साइबर थाना पर बढ़ते कार्यभार को देखते हुए तीन अतिरिक्त साइबर थाना खोलने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। प्रस्ताव के अनुसार अनुमोदन मिलते ही नगर पुलिस अधीक्षक मध्य, पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्र तथा पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के कार्यक्षेत्र में एक-एक साइबर थाना स्थापित किया जाएगा, ताकि साइबर अपराधों की जांच अधिक प्रभावी व त्वरित हो सके।

आइजी के कार्यालय कक्ष में साइबर अपराधों से संबंधित कांडों की समीक्षा बैठक में पुलिस अधीक्षक यातायात, साइबर थानाध्यक्ष सह डीएसपी नितीश चंद्र धारिया और साइबर थाना में पदस्थ तीन अन्य पुलिस उपाधीक्षक भी उपस्थित थे।

आइजी ने सभी स्तर के पुलिस पदाधिकारियों को लंबित मामलों में तेजी लाने, थानावार शार्ट लिस्ट करने और अनुसंधान में स्थानीय पुलिस का सहयोग लेने का निर्देश दिया। सभी पुलिस अधीक्षकों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि वह साइबर कांडों की डे-टू-डे निगरानी करें और हर माह बड़े साइबर प्रकरण का अनुसंधान स्वयं करें।

  
टेलीकाम कंपनी व बैंक अधिकारियों से करें समन्वय

अनुसंधानकर्ता संबंधित टेलीकाम कंपनी, इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म और बैंक अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर मामलों का शीघ्र निष्पादन करें। प्रत्येक थाना में एक अवर निरीक्षक को नामित किया जाएगा जो साइबर अनुसंधान में सहयोग करेगा। साथ ही साइबर थानाध्यक्ष और वहां तैनात तीनों डीएसपी स्वयं हर माह कम से कम पांच लंबित कांडों की जांच करेंगे।
तीन नए थाना खुलने से अनुसंधान की बढ़ेगी रफ्तार

आइजी राणा ने कहा कि प्रस्तावित तीन नए साइबर थानों के खुलने से जिला स्तर पर अनुसंधान की रफ्तार और दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे नागरिकों को साइबर अपराध से निपटने में त्वरित राहत मिल सकेगी।
अनुसंधानकर्ता पर है केस का दबाव

पटना साइबर थाना में तैनात हरेक अनुसंधानकर्ता पर केस का बोझ है। स्थिति यह है कि हरेक आइओ के पास तीन सौ से अधिक मामले हैं। ऐसे में तकनीकी जांच से लेकर दूसरे राज्यों में खातों की जांच सहित अन्य जांच में कई तरह की परेशनियो का सामना करना पड़ता है।
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