हाई कोर्ट ने हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति संबंधी याचिका निष्पादित कर दी है।
राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत में हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति के राज्य स्तरीय मेरिट लिस्ट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई हुई।
सुनवाई के बाद अदालत ने याचिका निष्पादित कर दी। अदालत ने कहा कि इस तरह का मामला खंडपीठ में लंबित है। खंडपीठ का जो भी आदेश होगा, उससे यह याचिकाएं प्रभावित होंगी।
रश्मि कुमारी बाला सहित आधा दर्जन याचिकाएं एकलपीठ में दायर की गई थीं। इसके पूर्व एक सितंबर को जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने हाई स्कूल शिक्षक नियुक्ति की राज्यस्तरीय मेरिट लिस्ट की जांच के लिए एक सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन करने का आदेश दिया था।
आयोग को तीन माह में अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। इस आदेश के खिलाफ सरकार और जेएसएससी ने खंडपीठ में अपील दायर की है।
अपील में जेएसएससी की ओर से कहा गया है कि एकल पीठ का आदेश उचित नहीं है और नियम संगत नहीं है, इसलिए एकल पीठ का आदेश निरस्त कर दिया जाना चाहिए।
जेएसएससी ने याचिका के माध्यम से लगभग 50 बिंदुओं को अदालत के समक्ष रखा है। जिसमें कहा है कि प्रार्थी ने कहा है कि कम अंक वाले को चयनित किया गया है और अधिक अंक वाले को चयनित नहीं किया गया है, यह पूरी तरह से गलत है।
हाई कोर्ट पर टिप्पणी मामले में प्रमोद सिंह को नोटिस
न्यायिक प्रक्रिया पर टिप्पणी करने के मामले में हाई कोर्ट ने रामगढ़ निवासी प्रमोद सिंह के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू की है।
जस्टिस एके राय की अदालत ने प्रमोद सिंह को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि क्यों नहीं उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना का मामला चलाया जाए। अदालत ने कहा कि प्रमोद सिंह का कृत्य न केवल अदालती आदेशों की अवहेलना है, बल्कि न्याय प्रशासन में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप और न्यायालय की गरिमा को कम करने का प्रयास है।
अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया माना कि आरोपित का आचरण आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है। आमतौर पर ऐसी कार्यवाही तब शुरू की जाती है, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर न्यायालय को अपमानित करता है या न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश करता है।
वीडियो पोस्ट कर न्यायिक प्रक्रिया पर कर रहे थे टिपण्णी
दरअसल, रामगढ़ के रहने वाले प्रमोद सिंह पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर न्यायिक प्रक्रिया पर कठोर टिपण्णी कर रहे थे, जिसकी आलोचना भी हो रही थी। इस बीच अदालत ने इस पूरे मामले पर संज्ञान लेकर अवमानना की कार्रवाई शुरू की है। |
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