पंजाब में मान सरकार की रोजगार क्रांति
डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में रोजगार के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। बीते साढ़े तीन वर्षों में राज्य सरकार ने 1.7 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी, निजी और संविदा नौकरियों से जोड़ा है। इनमें से 61,281 नियुक्तियां सरकारी पदों पर पूरी तरह मेरिट और पारदर्शिता के आधार पर की गई हैं, जिसने युवाओं के बीच एक नया भरोसा पैदा किया है।
मुख्यमंत्री मान का स्पष्ट संदेश है— “न सिफारिश, न रिश्वत, सिर्फ योग्यता।” इस सोच ने न केवल सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया को स्वच्छ बनाया, बल्कि प्रशासन की साख को भी मजबूत किया। वर्षों से चली आ रही पक्षपात और भ्रष्टाचार की शिकायतों के बीच यह बदलाव युवाओं के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरा है।
सबसे अधिक भर्तियां शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस और ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों में हुई हैं।
शिक्षा विभाग में 2,000 से अधिक पदों पर नियुक्तियां की गईं, जिनमें 725 स्पेशल एजुकेटर और मास्टर कैडर शिक्षक शामिल हैं। पुलिस विभाग में 1,746 कांस्टेबल भर्ती किए गए, जबकि स्वास्थ्य विभाग में 1,000 से अधिक मेडिकल ऑफिसर, नर्स और अन्य कर्मी नियुक्त हुए। ऊर्जा क्षेत्र में पीएसपीसीएल और पीएसटीसीएल के माध्यम से अप्रैल 2022 से अब तक 8,984 नियुक्तियां की जा चुकी हैं।
इन प्रयासों का बड़ा असर ब्रेन ड्रेन पर पड़ा है। अब युवाओं को राज्य छोड़ने की मजबूरी नहीं, बल्कि पंजाब में ही सम्मानजनक करियर के अवसर मिल रहे हैं। रोजगार अब सिर्फ सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं है। ‘रोज़गार क्रांति योजना’ के तहत परिवहन क्षेत्र में बड़े एकाधिकार को तोड़ते हुए 505 मिनी बस परमिट बेरोज़गार युवाओं को सौंपे गए हैं, जिससे स्वरोज़गार को भी बढ़ावा मिला है।
यह पहल केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि उस नई सोच का प्रतीक है जहां मेहनत, ईमानदारी और काबिलियत को सही मायने में सम्मान मिल रहा है। पंजाब में रोजगार का यह मॉडल आने वाली पीढ़ियों के लिए भरोसे और आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव रख रहा है। |