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जागरण संवाददाता, कानपुर। मुकदमे के आरोपितों का नाम विवेचना में हटाने के लिए 1.80 लाख मांगने व द्वेष भावना से चार्जशीट लगाने वाले नर्वल थाने के दारोगा को निलंबित कर दिया गया। महिला ने दहेज उत्पीड़न का यह मुकदमा पति व ससुरालीजन के खिलाफ कराया था। दारोगा की विभागीय जांच भी होगी।
नर्वल के दीपापुर निवासी रोहित तिवारी के मुताबिक उनकी शादी 11 जुलाई 2024 को नेहा तिवारी से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद दंपती में विवाद होने लगाई।
इसके बाद पत्नी ने दहेज की मांग व उत्पीड़न का आरोप लगा रोहित समेत परिवार के 12 लोगों के खिलाफ 26 सितंबर 2025 को नर्वल थाने में मुकदमा करा दिया, जिसकी जांच नर्वल थाने में तैनात दारोगा संदीप कुमार कर रहे थे।
उन्हें बताया कि बहन डीजीपी कार्यालय में तैनात है और भाई व बहू आइटीबीपी में हैं। जिस समय की घटना दिखाई गई है, उस समय वे लोग ड्यूटी पर थे। इसके साक्ष्य भी उन्होंने विवेचक को दिए थे।
रोहित का आरोप है कि विवेचक ने उनसे विवेचना में 12 लोगों में नौ के नाम हटाने के लिए 1.80 लाख रुपये मांगे थे।
जब रुपये नहीं दिए तो उन्होंने सभी 12 लोगों के खिलाफ चार्जशीट लगा दी। मामले की जांच डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने एसीपी चकेरी अभिषेक पांडेय को सौंपी। एसीपी ने बताया कि एक परिवार के 12 लोगों पर मुकदमा कराया गया। इसमें कुछ दूसरे शहर में सरकारी विभाग में कार्यरत हैं।
वह वहां ड्यूटी कर रहे हैं। ऐसे में उनके नाम शामिल कर चार्जशीट लगाना गलत है, जबकि इसके साक्ष्य भी उन्हें दिए गए थे। दारोगा पर रुपये मांगने का भी आरोप है, जिसकी रिपोर्ट बनाकर अधिकारी को दी गई है।
डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि दारोगा संदीप कुमार ने द्वेष भावना से विवेचना कर चार्जशीट लगाई है। इसलिए उन्हें निलंबित किया गया है। |
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