जाम नहीं खत्म कर पाया 112 करोड़ का फ्लाईओवर।
संवाद सूत्र, गोंडा। दो साल पहले 112 करोड़ रुपये से बने मिश्रौलिया फ्लाईओवर की दोनों तरफ के सर्विसलेन निर्माण में 14 भू स्वामियों की असहमति ने अड़ंगा डाल रखा है। इन्हें जमीन देने के लिए राजी नहीं किया जा सका। इसका खामियाजा 50 हजार शहरवासी भुगत रहे है। आसपास के जिलों से आए बस,टैंकर समेत अन्य बड़े वाहन संकरे सर्विस लेन में घंटों फंसे रहते हैं।
यही नहीं, इसका दर्द बलरामपुर, बहराइच, बाराबंकी, श्रावस्ती, अयोध्या समेत अन्य जिलों के लोगों को समेत अन्य वाहनाें के फंसने के कारण उसमें बैठे लोगों को भी भुगतना पड़ रहा है। नेपाल के तेल के टैंकरों के जाम में फंसकर विलंब से पहुंचने से वहां के लोगों भी परेशानी हो रही हैं।
बहराइच रोड स्थित मिश्रौलिया रेलवे क्रासिंग पर दो साल पहले 112 करोड़ रुपये से फ्लाईओवर बना था। उम्मीद जगी थी कि जाम से निजात मिल जाएगी लेकिन, संकरे सर्विस लेन ने सबके सपनों पर पानी फेर दिया।
सर्विस लेन बनाने के लिए दोनों तरफ पांच मीटर जमीन चाहिए थी लेकिन, पर्याप्त सरकारी भूमि नही मिली। तय हुआ कि 48 काश्तकारों की जमीन ली जाएगी लेकिन, मूल्य का पेच फंस गया।
मामला न्यायालय पहुंचा, जहां से जिला प्रशासन को समस्या निस्तारण की जिम्मेदारी मिली लेकिन,कुछ नहीं हुआ। अब तक 34 काश्तकारों ने ही जमीन देने की सहमति दी है। 14 काश्तकार जमीन के मूल्य से संतुष्ट नहीं है,जो भूमि देने से मना कर रहे हैं। ऐसे में दो साल से सर्विस लेन का निर्माण अटका है।
सर्विस लेन न बन पाने से दोनों तरफ संकरे मार्ग से वाहनों को निकलना पड़ रहा है, जिसमें वे फंस जा रहे हैं। यही नहीं, एक तरफ से वाहन निकल जाने के बाद दूसरे तरफ से आए वाहनों को जाने की अनुमति मिलती है। इसके चलते भीषण जाम लगता है।
यात्री ही नहीं, नेपाल के पेट्रोलियम टैंकर भी फंसकर लेटलतीफ हो जा रहे हैं, जिससे वहां भी परेशानी हो रही है। खास बात यह है कि दोनों तरफ के मार्ग कच्चे होने के साथ इतने संकरे व खतरनाक हैं कि लोग रोज चोटिल हो रहे हैं।
हर आधे घंटे पर लग रहे जाम में प्रतिदिन 50 हजार लोग परेशान हो रहे हैं और आधे शहर की यातायात व्यवस्था ध्वस्त हो जाती है। नगर मजिस्ट्रेट पंकज वर्मा ने बताया कि सर्विस लेन बनाने के लिए भूमि की समस्या है,जिसके लिए जिला प्रशासन प्रयासरत है। जल्द ही समस्या का हल निकल आएगा। |